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पाबंदी के बावजूद जलाई जा रही है पराली, दमघोंटू हुई दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा

October 31st, 2019 21:31 IST
 पाबंदी के बावजूद जलाई जा रही है पराली, दमघोंटू हुई दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा

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  • पाबंदी के बावजूद जलाई जा रही है पराली, दमघोंटू हुई दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पराली जलाने पर पाबंदी के बावजूद पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जिससे देश की राजधानी और इससे लगे इलाकों की आबोहवा बदतर हो गई है।

पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण के खतरों के मद्देनजर केंद्र सरकार किसानों को आवश्यक प्रौद्योगिकी और मशीनों के लिए 50 से 80 फीसदी तक अनुदान मुहैया करवा रही है, जिससे किसान पराली जलाने के बजाय उसे खेतों में मिलाकर खाद बना सकते हैं। लेकिन, फिर भी समस्या बनी हुई है।

मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि किसानों को यह सुविधा राज्य सरकारों के माध्यम से मुहैया करवाई जा रही है और इस पर सरकार विगत कुछ वर्षो से करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।

हरियाणा के सिरसा के किसान संजय न्योल ने बताया कि पराली जलाने के खतरे से जागरूक किसान अब खेतों में पराली को जलाने के बजाय उसे मशीनों का इस्तेमाल कर मिट्टी में मिला देते हैं, जिससे वह खाद बन जाती है, लेकिन कुछ जगहों पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जहां कार्रवाई भी की गई है।

पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में बीते तीन दिनों से छाई धुंध की सबसे बड़ी वजह पराली जलाना है।

टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट) के विशेषज्ञ सुमित शर्मा ने बताया कि इस सीजन के दौरान दिल्ली-एनसीआर में कोहरा छाने और प्रदूषण का स्तर बढ़ने में 30-40 फीसदी तक योगदान पराली जलाने से होने वालू प्रदूषण का होता है, जबकि वाहनों से 20 फीसदी, औद्योगिक प्रदूषण का हिस्सा 20 फीसदी, रिहायशी प्रदूषण यानी लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा पांच फीसदी, निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 10 फीसदी और पांच फीसदी योगदान अन्य प्रकार के प्रदूषणों का होता है।

सफर इंडिया के मुताबिक, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 412 हो गया है जो वायु गुणवत्ता के बेहद गंभीर होने की कटेगरी में आता है।

पंजाब व हरियाणा में पराली जलने की घटनाओं में इजाफा होने की पुष्टि सफर के मल्टी सेटेलाइट फायर प्रोडक्ट से होती है।

दिल्ली में छाई धुंध और वायु की गुणवत्ता खराब होने में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान सीजन के सबसे उच्चस्तर पर रहा। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान बुधवार को 35 फीसदी रहा, इसके गुरुवार को 27 फीसदी रहने व शुक्रवार को 25 फीसदी रहने का अनुमान है।

हरियाणा के ही एक किसान ने बताया कि पराली जलाने की घटना की शिकायत किए जाने पर दमकल से आग बुझाई जा रही है और इस पर होने वाला खर्च किसानों से वसूला जा रहा है। साथ ही, पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।