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तब्लीगी जमात: सरकार ने ​2,550 विदेशी नागरिकों को 10 साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया, दिल्ली हिंसा से भी जुड़े तार

June 04th, 2020 20:50 IST
तब्लीगी जमात: सरकार ने ​2,550 विदेशी नागरिकों को 10 साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया, दिल्ली हिंसा से भी जुड़े तार

हाईलाइट

  • ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर धार्मिक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे
  • दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस ने नई चार्जशीट पेश की थी
  • चार्जशीट में आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने का मास्टमाइंड बताया गया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने तब्‍लीगी जमात की गतिविधियों में शामिल होने वाले 2,550 विदेशी नागरिकों के भारत आने पर 10 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर धार्मिक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। यह न्यूज एंजेसी ने सरकारी सूत्रों के हवाले गुरुवार को  दी। 

इन सभी पर आरोप है कि कोरोना वायरस के संक्रमण शुरुआती दौर में इन्होंने गैरकानूनी तरीके से भीड़ इकट्ठा की, जिससे यह वायरस तेजी से फैला और फिर इसकी चपेट में देश के कई राज्यों के लोग आए। शुरुआती दौर में इनके कारण करीब एक तिहाई लोगों और 17 राज्‍यों में संक्रमण फैला और काफी लोगों की मौत हुई। इन विदेशी जमातियों की संख्या बढ़ सकती है। ये नागरिक माली, नाइजीरिया, श्रीलंका, केन्या, तंजानिया, दक्षिण, अफ्रीका, म्यांमार, थाईलैंड, बांग्लादेश, यूके, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से हैं। 

इससे पहले उत्तरी दिल्ली में इसी साल 24 फरवरी को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने नई चार्जशीट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि हिंसा के तार तब्लीगी जमात और यूपी के दारुल उलूम देवबंद से जुड़े हैं।

निजामुद्दीन मरकज में इकट्ठा हुए थे हजारों लोग   
15 मार्च के आसपास देश में कोरोना वायरस का संक्रमण देश में फैलने के साथ लॉकडाउन की शुरुआत हो गई थी, लेकिन दिल्‍ली में धारा 144 लागू होने के बावजूद हजारों जमाती हजरत निजामुद्दीन स्थित तब्‍लीगी मरकज में कई दिनों तक इकट्ठा रहे। इस दौरान कई कथित ऑडियो भी सामने आए, जिसमें हजरत निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज के मुखिया मौलाना साद यह कह रहे थे कि कोरोना वारयस से डरने की जरूरत नहीं है।

अब भी फरार है तब्लीगी जमात का मास्टर माइंड मौलाना साद
निजामुद्दीन मरकज में इकट्ठे हुए तब्‍लीगी जमात के लोगों की वजह से देश में कोरोना के कई मामले बढ़ गए थे। विभिन्न राज्यों में जाने से कोरोना तेजी से फैल गया था और इसके बाद मौलाना साद की भी काफी आलोचना हुई। वह आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस कड़ी में दिल्‍ली पुलिस ने पिछले गुरुवार को साकेत कोर्ट में 12 नई चार्जशीट दाखिल की। इसमें 541 विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब तक कुल 47 चार्जशीट फाइल कर चुकी है। इनमें 900 से अधिक जमातियों को आरोपी बनाया गया है।

दिल्ली हिंसा कनेक्शन

  • दिल्ली पुलिस ने दो नई चार्जशीट दाखिल की: 24 फरवरी को पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के विरोध में हिंसा हुई थी। पहला केस चांद बाग हिंसा और दूसरा मामला जाफराबाद दंगे से जुड़ा है। पुलिस ने चांद बाग हिंसा मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगों का मास्टरमाइंड बताया है। इन मामलों में पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में दो चार्जशीट दाखिल की थीं। ताहिर के अलावा उनके भाई शाह आलम समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हिंसा के वक्त ताहिर हुसैन अपने घर की छत पर था और उसने ही हिंसा भड़काने का काम किया था। इस मामले में 15 पुलिसकर्मियों को भी गवाह बनाया गया है। 
  • राजधानी स्कूल का मालिक फैसल भी आरोपी, हिंसा से पहले देवबंद गया था: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार में राजधानी स्कूल के पास सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के नाम पर  भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है। उसमें राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारुक को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में बताया गया है कि हिंसा के मामलों से पहले उत्तर प्रदेश के दारुल उलूम देवबंद गया था। उसके निजामुद्दीन मरकज से भी ताल्लुकात हैं।
  • हिंसा भड़का ने की साजिश रची: न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि फैसल की कॉल डिटेल देखने के बाद पता लगा है कि उसके पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, पिंजरातोड़ ग्रुप, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी, निजामुद्दीन मरकज और अन्य मुस्लिम संगठनों से संबंध हैं। हिंसा की साजिश में भी फैसल का हाथ है। शिव विहार कॉलोनी में हुई हिंसा से पहले फैसल 23 फरवरी को देवबंद गया था। उसने ही हिंसा भड़काने की साजिश रची थी।
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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।