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देश की राजधानी इस कारण बनी क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

October 22nd, 2019 21:30 IST
 देश की राजधानी इस कारण बनी क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

हाईलाइट

  • देश की राजधानी इस कारण बनी क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्थानीय पुलिस स्कॉटलैंड स्टाइल पर काम करती है। राजधानी पुलिस की रिपोर्टिग सीधे केंद्रीय गृह-मंत्रालय को होती है। बाकी राज्यों की तुलना में संसाधनों के नजरिए से दिल्ली पुलिस तकरीबन सबसे आगे ही रहती है। बजट में भी किसी तरह की कोई कमी नहीं। हथियार, पुलिस प्रशिक्षण, तकनीक में देश के बाकी राज्यों की पुलिस से कहीं ज्यादा बेहतर। दो-चार दिन पहले ही दिल्ली पुलिस आयुक्त इंटरपोल जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था की बैठक में हिस्सा लेकर लौटे हैं।

कुल जमा दिल्ली पुलिस की ऐसी कोई शाखा या अनुभाग नहीं, जो अभावों की वैसाखियों या किसी और के रहम-ओ-करम पर घिसट रही हो। इन तमाम तामझाम के बाद भी अपराध और अपराधी सबसे ज्यादा दिल्ली में ही फल-फूल रहे हैं। आखिर क्यों? यह सवाल किसी के जेहन में उठना लाजिमी है। दिल्ली पुलिस के खिलाफ यह कोई मीडिया का मनगढ़ंत विचार नहीं है। यह सब दर्ज है राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की सोमवार को जारी हुई रपट क्राइम इन इंडिया-2017 में। अपराध के मामले में दिल्ली ने पहला स्थान हासिल किया है।

एनसीआरबी द्वारा जारी हालिया (सन 2017 की) रिपोर्ट पर नजर डालें तो राष्ट्रीय राजधानी में 2016 की तुलना में 2017 में 11 फीसदी अपराध बढ़े हैं। यह सनसनीखेज आंकड़ा ही साबित करने के लिए काफी है कि देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर क्राइम-कैपिटल के रूप में बन गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में दर्ज कुल आपराधिक घटनाओं में 4.9 प्रतिशत सिर्फ दिल्ली में है। एक साल की देरी से सोमवार को एनसीआरबी द्वारा जारी 2017 के इन आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 में दिल्ली में दो लाख 32 हजार से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जोकि देश भर में दर्ज आपराधिक मामलों का 4.9 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 2 लाख 44 हजार 714 मामलों में से 2 लाख 32 हजार 66 मामले आईपीसी की धारा के तहत दर्ज किए गए।

एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में साल 2017 में 50 लाख से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। जबकि यह संख्या 2016 में करीब 48 लाख थी। यानी इस हिसाब से 2017 में 3.6 फीसदी ज्यादा एफआईआर देश में दर्ज हुईं। हालांकि साल 2017 में देश भर में अपहरण के मामलों में नौ फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसी तरह देश में 2016 में हत्या के करीब 30 हजार 450 केस दर्ज हुए। जबकि 2017 में यह संख्या घटकर 28 हजार 653 पर आ गई है। मतलब देश में कुल जमा सन् 2017 में हत्या की वारदातों में कमी आई। हालांकि 2016 में अपहरण और फिरौती के मामलों में खासा इजाफा हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक, सन् 2016 में अपहरण फिरौती के 88 हजार 8 मामले दर्ज किए गए। जबकि इस मद में 2017 में आंकड़ा बढ़कर 95 हजार 893 पहुंच गया।

यहां उन आंकड़ों का जिक्र करना भी जरूरी है, जिनमें देश भर में 2016 की तुलना में 2017 में साइबर अपराध के मामलों में इजाफा हुआ। 2016 में जहां यह संख्या 12137 थी, वहीं 2017 में बढ़कर साइबर अपराध के मामले 21796 तक पहुंच गए।

एनसीआरबी के जारी इन आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए, तो देश में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली अपराध के नजरिए से पहले पायदान पर खड़ी शरमाती नजर आ रही है। जबकि दिल्ली पुलिस के पास धन-संसाधन-तकनीक में से किसी चीज की कमी नहीं है। आखिर ऐसा क्यों?

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता और मध्य दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त मंदीप सिंह रंधावा ने आईएएनएस से कहा, नहीं ऐसा नहीं है। 2016 के आंकड़ों की तुलना 2017 के आंकड़ों से की जाए तो, दिल्ली में हत्या के मामलों में कमी आई है।

फिर भी दिल्ली क्राइम कैपिटल क्यों साबित हुई? उन्होंने कहा, दरअसल, हमारे यहां ऑनलाइन (ईएफआईआर रजिस्ट्रेशन) भी है। इसलिए दर्ज मामलों का प्रतिशत देश के बाकी राज्यों की तुलना में ज्यादा होना स्वाभाविक है।

दिल्ली के फिर से क्राइम कैपिटल बनने को लेकर दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त और भारतीय इंटेलिजेंस ब्यूरो के सेवानिवृत्त निदेशक अरुण भगत ने आईएएनएस से कहा, हाल के कुछ वर्षों में दिल्ली में जितने भी पुलिस आयुक्त आए, उन्होंने एफआईआर फ्री रजिस्ट्रेशन की जो सुविधा मुहैया करवाई, वही दिल्ली पुलिस के गले की फांस बन गई है।

सन् 1990 से 1992 तक दिल्ली के पुलिस आयुक्त रहे दिल्ली हिमाचल काडर 1961 बैच के पूर्व आईपीएस अरुण भगत के मुताबिक, देश के दूर दराज इलाके से आदमी सुबह आकर शाम को दिल्ली से वापस चला जाता है। दिल्ली में अपराध और अपराधी बढ़ने के पीछे एक यह भी प्रमुख वजह है। उनके मुताबिक, अपराध तो भारत से ज्यादा लंदन में होते हैं। हां मगर जिस तरह आजकल झपटमारी के अपराध का खतरनाक ट्रेंड दिल्ली में आया है, वह बेहद खतरनाक है।

दिल्ली में बढ़ते अपराध की वजह अपराधियों का पुलिस पर हावी हो जाना है। यानी पुलिस सुस्त पड़ी हुई है? दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा, नहीं ऐसा नहीं है। जहां अपराधी को बिना हथकड़ी ले जाने का कानून होगा, वहां भय कहां होगा? पुलिस क्या करेगी? अपराधी को जेल भेजा जाता है तो वो कुछ दिन बाद ही जमानत पर बाहर आ जाता है। अब कानून जितना पुलिस जानती है उससे ज्यादा अपराधी कानून का जानकार हो गया है।

दिल्ली पुलिस के पूर्व पुलिस कमिश्नर और सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक नीरज कुमार ने आईएएनएस से कहा, हरियाणा का कानून देखिए, वहां झपटमारों को अदालत से जमानत मिलने का कानून ही नहीं है। दिल्ली में पकड़े जाने के बाद कब अपराधी जमानत पर जेल से बाहर निकल आए कोई भरोसा नहीं। दिल्ली की बढ़ती आबादी भी दिल्ली को क्राइम कैपिटल बनाने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। हां, पुलिस जब-जब तटस्थ होगी, अपराधी तब-तब उसके सामने मजबूती से खड़ा नजर आएगा।

नीरज कुमार ने आगे कहा, ऐसा नहीं है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की नजर दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर नहीं रहती है। नजर पूरी रहती है। हां, जब-जब राजधानी में क्राइम बढ़ता है, वह घटना कुछ दिन बाद दब जाती है। या फिर सरकार सोचती है कि चलो यह घटना आकस्मिक थी। बाद में बात आई गई हो जाती है। वैसे दिल्ली में अपराधों की मारा-मारी के लिए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम भी काफी हद तक जिम्मेदार है।

-- आईएएनएस

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