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हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम तय करेंगे खट्टर और फडणवीस का भविष्य 

हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम तय करेंगे खट्टर और फडणवीस का भविष्य 

हाईलाइट

  • पिछली बार से ज्यादा सीटें आईं तो मुख्यमंत्रियों का पार्टी में कद बढ़ेगा
  • अगर सीटों का नुकसान हुआ तो दोनों के नेतृत्व पर सवाल उठ सकते हैं
  • 2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों राज्यों में मोदी लहर से मिली थी जीत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के गुरुवार (24 अक्टूबर) को परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस का भविष्य भी तय हो जाएगा। अगर दोनों राज्यों में पिछली बार से ज्यादा सीटें आईं तो मुख्यमंत्रियों का पार्टी में कद बढ़ेगा, वहीं अगर सीटों का नुकसान हुआ तो पार्टी के अंदरखाने दोनों के नेतृत्व पर भी सवाल उठ सकते हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि चुनाव से पहले ही इस बात से खट्टर और फडणवीस दोनों भलीभांति वाकिफ रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही सभी सीटों से गुजरने वाली यात्राएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया।

2014 में मोदी लहर ने दिलाई थी जीत
दरअसल, 2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों राज्यों में पार्टी ने कोई स्थानीय चेहरा तय किए बगैर ही चुनाव लड़ा था। मई में तब मोदी सरकार सत्ता में आई थी। भाजपा के पक्ष में तेज लहर चल रही थी, उसी मोमेंटम में करीब 5 महीने बाद ही अक्टूबर में दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जीत की लय बरकरार रखी।

हरियाणा में 47 सीटें जीतकर पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी, तो महाराष्ट्र में सर्वाधिक 122 सीटें जीतने के बाद भी बहुमत से दूर रहने पर शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार बनाना पड़ा था। भाजपा ने दोनों राज्यों का विधानसभा चुनाव तब प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ा था। नतीजे घोषित होने के बाद पार्टी ने हरियाणा में गैर जाट मनोहर लाल खट्टर और महाराष्ट्र में गैर मराठा ब्राह्मण चेहरे फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था।

इस बार दोनों सीएम रहे चुनाव के चेहरे
इस बार पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों के चेहरे को ही आगे कर चुनाव लड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह राज्यों की हर चुनावी रैली में मुख्यमंत्रियों का गुणगान करते रहे। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगर हरियाणा में पार्टी की इस बार 47 से ज्यादा सीटें आईं और महाराष्ट्र में पिछली बार की 122 से ज्यादा सीटें आईं तो तब तो माना जाएगा कि दोनों चेहरे चुनाव में चल गए और अगर इससे कम सीटें आईं तो माना जाएगा कि पार्टी की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे। वहीं पार्टी के अंदर मौजूद दोनों मुख्यमंत्रियों का विरोधी धड़ा भी नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।

दोनों राज्यों में बहुमत के साथ बनाएंगे सरकार
भाजपा के एक नेता ने कहा कि यह सच है कि धमाकेदार जीत जरूर दोनों मुख्यमंत्रियों का कद बढ़ाएगी, मगर पिछली बार से कम सीटें आने की बात करना ही बेकार है। हरियाणा में खट्टर और महाराष्ट्र में फडणवीस ने राजनीति की पुरानी मान्यताओं को ध्वस्त करते हुए विकास का नया मॉडल खड़ा किया है। यही वजह है कि पार्टी ने उनके चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ा। जनता वोट देते समय मोदी का चेहरा देखती है। दोनों राज्यों में बहुमत की सरकार बनने जा रही है।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।