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3 साल में विदेशों में फंसे 80 हजार लोगों को निकाला : सुषमा स्वराज

August 28th, 2017 20:52 IST
3 साल में विदेशों में फंसे 80 हजार लोगों को निकाला : सुषमा स्वराज

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पिछले तीन सालों में विदेशों में फंसे 80 हजार लोगों को वापस भारत में लाया गया है। सुषमा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अकेले यमन देश से 4500 भारतीयों और पाकिस्तान, अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से 2000 विदेशी नागरिकों को निकाला है। इन देशों ने लिखित में भारत सरकार को अनुरोध किया था कि हम में से कोई भी अपने देश के नागरिकों को निकालने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। सरकार ने दूसरे देशों के नागरिकों की भी मदद की है।

सुषमा ने कहा कि विदेशों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लाना आसान नहीं है। मैं यमन देश का उल्लेख करना चाहूंगी। यमन एक ऐसा देश था जहां पर जल, थल और नभ तीनों संकटग्रस्त थे। ऐसे में हमने पीएम नरेंद्र मोदी के प्रभावी चेहरे का इस्तेमाल किया। पूरे विश्व में भारत को अलग दृष्टि से देखा जाने लगा है। भारत वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश बन गया है।  सुषमा ने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में देश के पहले विदेश भवन का उद्घाटन किया। इस मौके पर सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थ।

हर राज्य की राजधानी में विदेश भवन खोलने पर विचार

विदेश मंत्री ने कहा कि देश के हर राज्य की राजधानी में विदेश भवन खोलने की योजना है। जहां पर एक ही छत के नीचे विदेश मंत्रालय से जुड़े सभी काम एक ही जगह हो सकेंगे। केंद्र सरकार की नीति से विदेश जाने वाले भारतीयों को फायदा होगा। सुषमा ने कहा कि 2014 तक देश में 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे। लेकिन सरकार ने पिछले छह महीने में इसे बढ़ाकर 235 कर दिया है। सुषमा ने कहा कि विदेश मंत्रालय का चाल, चरित्र और चेहरा बदल चुका है। मुंबई के बीकेसी में विदेश मंत्रालय से जुड़े चार क्षेत्रीय कार्यालय- क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ), प्रवासी संरक्षक कार्यालय (पीओई), शाखा सचिवालय और आईसीसीआर के क्षेत्रीय कार्यालय को एक छत के नीचे लाया गया है।

तलाकशुदा महिलाओं को आसानी से मिलेगा पासपोर्ट

सुषमा ने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं को पासपोर्ट पाने में आसानी हो इसके लिए नियम ही बदल दिया गया है। हमने तय किया है कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाली किसी भी तलाकशुदा महिला से यह नहीं पूछा जाएगा कि उसने अपने पूर्व पति का नाम क्यों नहीं लिखा। महिला अपनी इच्छा अनुसार अपनी मां का नाम लिख सकती है। इसी तरह किसी महिला ने यदि कोई बच्चा गोद लिया है तो पासपोर्ट बनाते समय बच्चे को मां के रूप में उस महिला का नाम लिखने की अनुमति होगी। एकल अभिभावक (सिंगल पेरेंट्स) की स्थिति में किसी एक का यानी माता या फिर पिता का नाम लिखा जा सकता है। जन्म तारीख की दिक्कतों के कारण अनाथालय के बच्चों को पासपोर्ट मिलने में मुश्किल हो रही थी। फिर हमने फैसला लिया कि अनाथालय का मुखिया बच्चे को जो जन्म तिथि लिखकर देगा, उसको स्वीकार कर लिया जाएगा।

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