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मानसिक बीमारी से जूझ रहीं हैं विद्या बालन, गंदगी देखकर हो जाती हैं आउट ऑफ कंट्रोल

January 08th, 2019 21:29 IST

डिजिटल डेस्क। बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन ने हाल ही में नए साल के दिन अपना 40वां बर्थडे सेलिब्रेट किया है। वह जल्द ही महान एक्टर और आंध्रप्रदेश के पूर्व सीएम एन.टी.रामाराव की बायोपिक में भी नजर आने वाली हैं। फिल्म इंडस्ट्री में विद्या एक बड़ा नाम है, वे उन अभिनेत्रियों की लिस्ट में शुमार है जिन्हें अपनी फिल्मों को हिट कराने के लिए किसी अभिनेता की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन बेहद शालीन और खूबसूरत एक्ट्रेस विद्या बालन अब एक मानसिक बीमारी की गिरफ्त में जा चुकी हैं। वे OCD यानी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर बीमारी से जूझ रहीं हैं।

इस बीमारी व्यक्ति को किसी एक काम को करने की सनक सी सवार हो जाती है। विद्या बालन के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उन्हें अपने आसपास सफाई बहुत पसंद है। अगर उन्हें अपने आसपास थोड़ी सी भी धूल मिट्टी दिख जाती है तो उनके दिमाग के नेगेटिव हॉर्मोन्स एक्टिव हो जाते हैं, जिसके चलते उन्हें एलर्जी हो जाती है। सिर्फ यही नहीं विद्या को यह भी पसंद नहीं है कि उनके घर में कोई चप्पल पहनकर घूमे। OCD बीमारी में ब्रेन में सेरोटोनिन नामक न्‍यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है। इसका कारण इंफेक्‍शन, स्ट्रेस आनुवांशिकता और ब्रेन में सेरोटोनिन नामक न्‍यूरोट्रांसमीटर की कमी भी होता है। 

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर (OCD) के लक्षण

  • OCD के कारण पीड़ित में आमतौर पर सफाई और बार-बार हाथ धोने का कंपल्शन होता है।
  • धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देना।
  • यदि सब कुछ ठीक ढंग से नहीं हुआ तो कुछ बुरा हो जाएगा या वे सजा के भागी बन जाएंगे।
  • कीटाणुओं और गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों को दूषित कर देने का डर रहता है।
  • डर से जुड़ी चीजों को महसूस करना जैसे, घर में कोई बाहरी व्यक्ति घुस आया है।
  • ऐसे लोगों को किसी और को नुकसान पहुंचने का डर भी रहता है।
  • किसी चीज को भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली मानने का अंधविश्वास।
  • चीजों को बेवजह बार-बार जांचना, जैसे कि ताले, उपकरण और स्विच आदि।
  • बेकार की चीजें इकट्ठा करना जैसे कि पुराने न्यूजपेपर, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि।

OCD से बचाव
ऐसी दवाइयां मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं। डॉक्टर कई बार इलाज के लिए इन दवाओं को लेने की सलाह देते हैं, जिन्हें लंबे समय तक लेना होता है। कभी-कभी चिंताओं और तनाव को दूर करने वाली दवाएं भी इनके साथ दी जाती हैं। इसके साथ बिहेवियर थैरेपी की मदद भी ली जाती है। जिसके अंतर्गत रोगी को शांत रहने वाले एक्सरसाइज सिखाए जाते हैं। बिहेवियर थैरेपी के तहत उसे इन विचारों से मुक्त होने के लिए कुछ तकनीकें भी सिखाई जाती हैं। हालांकि गंदगी संबंधी विचारों के मामले में इलाज के तौर पर रोगी को कुछ समय तक गंदगी में रखा जाता है और उससे कहा जाता है कि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक हाथ धोने से बचे। जिस तह वह धीरे-धीरे इन विचारों से मुक्ति पाना सीख जाता है।

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