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जिग्ना वोरा की रिहाई का फैसला हाईकोर्ट ने रखा बरकरार ,सीबीआई की अपील खारिज

जिग्ना वोरा की रिहाई का फैसला हाईकोर्ट ने रखा बरकरार ,सीबीआई की अपील खारिज

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्रकार जेडे हत्याकांड मामले से सीबीआई कोर्ट द्वारा बरी की गई पूर्व पत्रकार जिग्ना बोरा की रिहाई के आदेश को बरककार रखा है। न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति एसके शिंदे की खंडपीठ ने रिहाई के खिलाफ सीबीआई की ओर से की गई अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई प्रत्यक्ष रुप से ऐसा कोई सबूत नहीं पेश कर पायी जो इस मामले में सीधे तौर पर वोरा की संलिप्तता को दर्शाता हो।  साल 2018 में सीबीआई कोर्ट ने इस प्रकरण में माफिया सरगना छोटा राजन सहित आठ लोगों को दोषी ठहराया था। जबकि मामले में आरोपी  जिग्ना वोरा  व पाल्सन जोसेफ को सबूत के अभाव में बरी कर दिया था। सीबीआई ने आरोपपत्र में दावा किया था कि पेशेगत विद्वेष के चलते एक अंग्रेजी अखबार में बतौर पत्रकार काम करनेवाले जेडे के खिलाफ छोटा राजन के पास शिकायत की थी। यहीं नहीं उसने जेडे की तस्वीर व उसकी मोटलसाइकिल का नंबर भी उपलब्ध कराया था।  

11 जून 2011 को जेडे को पवई इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक माफिया सरगना राजन उसको लेकर जेडे की नकारात्मक खबरों से खुश नहीं था। इसलिए उसके निर्देश पर पत्रकार डे की हत्या की गई थी।  खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई ने आरोपी वोरा के खिलाफ सबूत के तौर पर मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के बीच फोन पर हुई बातचीत को पेश किया है। लेकिन इन फोनकॉल से यह स्पष्ट नहीं होता है आरोपी वोरा पत्रकार जे डे की हत्या से जुड़ी साजिश में शामिल थी अथवा उसके कहने पर पत्रकार जेडे की हत्या की गई। इसके अलावा माफिया सरगना छोटा राजन द्वारा दिए गए इकबालिया बयान में भी इस बात का जिक्र नहीं है कि आरोपी जिग्ना बोरा ने उसे पत्रकार जेडे के खिलाफ भड़काया था। खंडपीठ ने साफ किया कि सीबीआई ने सीधे तौर पर ऐसा कोई सबूत नहीं पेश किया है जो प्रत्यक्ष रुप से इस प्रकरण में आरोपी जिग्ना बोरा की संलिप्तता को दर्शाता हो। यह कहते हुए खंडपीठ ने पूर्व पत्रकार जिग्ना बोरा के रिहाई के आदेश को बरकरार रखा। 

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