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दिल्ली में हवा बनी जहर, सीएम केजरीवाल ने बांटे छात्रों को मास्क


हाईलाइट

  • दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर
  • लोगों को हो रही सांस लेने में तकलीफ
  • सीएम केजरीवाल ने स्कूली छात्रों को बांटे मास्क

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है। प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि लोगो कों सांस लेने में दिक्कत हो रही है। दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में धूल और धुंध छा गई है। दिवाली के बाद से दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में आ रही है। लोगों को मास्क लगाकर बाहर निकलना पड़ रहा है। 

सीएम ने बांटे मास्क

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखते हुए सभी स्कूलों के छात्रों को मास्क बांटे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आस-पास के राज्यों में जलने वाले धुएं से धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर बिगड़ गया है, जिनकी संख्या इस साल दोगुनी हो गई है। लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, और राहत प्रदान करने के लिए, हम निजी और सरकारी स्कूलों में प्रत्येक छात्र को 2 मास्क वितरित कर रहे हैं।

हवा की गुणवत्ता खराब

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शुक्रवार को दिल्ली में सुबह मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम और इंडिया गेट के आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बहुत ज्यादा खराब थी। 

वहीं राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार गाजियाबाद में प्रदूषण पीएम 467 से 487 के बीच गंभीर श्रेणी में था।

पराली जलाने का असर

पंजाब और हरियाणा में प्रतिबंध के बावजूद लगातार पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की वायु गुणवत्ता बहुत ज्यादा बिगड़ गई है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) इंडिया के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 412 पर पहुंच गया है जो अति गंभीर श्रेणी में आता है। आंकड़ों के अनुसार, पराली जलाए जाने से दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को धुंध और वायु प्रदूषण 35 प्रतिशत रहा। फसल के अवशेषों को जलाने की अपेक्षा उन्हें उर्वरकों में बदलने के लिए जरूरी तकनीकों और मशीनरियों को खरीदने के लिए किसानों को केंद्र सरकार द्वारा 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान किए जाने के बावजूद पराली जलाए जाने की समस्या अभी भी है। सरकार के एक सूत्र ने गुरुवार को कहा कि किसानों को राज्य सरकारें सुविधाएं दे रही हैं, और पिछले कुछ सालों ने केंद्र ने इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।
 

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