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बाहुबली ठाकुर परिवार को चुनौती देंगे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा -  पुलिस से इस्तीफा 

बाहुबली ठाकुर परिवार को चुनौती देंगे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा -  पुलिस से इस्तीफा 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पुलिस महकमे से इस्तीफा देने वाले एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा नालासोपारा से बाहुबली हितेंद्र ठाकुर को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि शर्मा फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से बच रहें हैं लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस उत्तरभारतीय बहुल इलाके से शिवसेना उन्हें चुनावी मैदान में उतार सकती है। शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा इलाके के रहने वाले हैं, इसलिए उन्हें उत्तर भारतीयों का समर्थन मिल सकता है। फिलहाल नालासोपारा से हितेंद्र के बेटे क्षितिज ठाकुर विधायक हैं। लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों में पालघर सीट से शिवसेना उम्मीदवार राजेंद्र गावित विजयी हुए थे। नालासोपारा क्षेत्र से भी उन्हें 26 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त मिली थी। इससे उत्साहित शिवसेना विधानसभा चुनाव में भी तगड़ा उम्मीदवार खड़ा कर ठाकुर परिवार को चुनौती देने की कोशिश में है। 2014 के विधानसभा चुनाव में नालासोपारा सीट से भाजपा उम्मीदवार दूसरे जबकि शिवसेना उम्मीदवार तीसरे स्थान पर था। लेकिन युति के बाद शिवसेना इस सीट पर नजर गड़ाए हुए है। दूसरी तरफ शर्मा के भाजपा में भी जाने की अटकलें चल रहीं हैं क्योंकि उनकी नजर अंधेरी सीट पर भी है। शर्मा के करीबी सूत्रों के मुताबिक अगर युति हुई तो वे शिवसेना के टिकट पर नालासोपारा से चुनाव लड़ सकते हैं और अगर दोनों पार्टियां अलग चुनाव लड़तीं हैं तो भाजपा के टिकट पर अंधेरी से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। फिलहाल अंधेरी सीट पर शिवसेना का कब्जा है। शर्मा अभी खुलकर इस मामले पर बोलने को तैयार नहीं हैं। शुक्रवार को उन्होंने इस्तीफे की पुष्टि तो की लेकिन राजनीति के मैदान में आने से जुड़े सवाल पर वे इंतजार करने को कहते हैं। शर्मा ने 4 जुलाई को इस्तीफा दिया है जिसे स्वीकार होने में एक महीने का वक्त लग सकता है। 

हिरो से जीरो बने थे शर्मा 

करीब 100 एनकाउंटर में शामिल रहे शर्मा का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। शर्मा का परिवार मूल रूप से आगरा का रहने वाला है लेकिन उनके पिता धुले के एक कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। शर्मा ने भी धुले से ही एमएससी तक पढ़ाई की और फिर 1983 में बतौर उपनिरीक्षक महाराष्ट्र पुलिस में शामिल हो गए। शर्मा सुर्खियों में तब आए जब उनका तबादला मुंबई पुलिस की अपराध शाखा में हुआ। युति की पहली सरकार में तत्कालीन गृहमंत्री गोपीनाथ मुंडे ने शर्मा और विजय सालस्कर को अंडरवर्ल्ड पर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद शर्मा ने दाऊद और छोटा राजन जबकि सालस्कर ने गवली गिरोह के अपराधियों को खत्म करना शुरू किया। कुछ एनकाउंटर विवादों में रहे और मामले अदालतों तक पहुंचे जिसके बाद एनकाउंटरों में कमी आई। बाद में शर्मा पर आपराधिक गिरोहों से सांठगाठ के भी आरोप लगे। इसी तरह के आरोप के चलते बाद में उन्हें साल 2008 में निलंबित कर दिया गया। साल 2009 में उन्हें फिर नौकरी पर बहाल कर दिया गया। बाद में शर्मा लखनभैया एनकाउंटर मामले में आरोपों के घेरे में आए। लखनभैया के परिवार ने दावा किया कि यह हत्या का मामला है। मामले में प्रदीप शर्मा समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बाद में इस मामले से शर्मा को तो अदालत ने बरी कर दिया लेकिन बाकी आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई। बरी होने के बाद शर्मा को ठाणे पुलिस की अपराध शाखा में तैनात किया गया जहां उन्होंने पिछले साल दाऊद के भाई इकबाल कासकर को हफ्ता वसूली के मामले में गिरफ्तार किया। कासकर अभी भी जेल में है। नाना पाटेकर की फिल्म ‘अब तक 56’ प्रदीप शर्मा पर ही आधारित थी। 

खाकी का खादी प्रेम 

प्रदीप शर्मा इकलौते नहीं है कई पुलिसवाले हैं जिन्होंने खाकी छोड़ने के बाद खादी की ओर कदम बढ़ाया है। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने भाजपा का दामन थामा और उत्तर प्रदेश से दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतने के बाद फिलहाल केंद्र में राज्यमंत्री हैं। मुंबई पुलिस के ही पूर्व पुलिस कमिश्नर अरूप पटनायक ने भी उड़ीसा से बीजेडी की टिकट पर किस्मत आजमाई लेकिन असफल रहे। पूर्व आईपीएस वीवी लक्ष्मीनारायण भी उन पुलिसवालों में से हैं जिन्होंने खाकी छोड़कर खादी की ओर कदम बढ़ाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे राजनीति में आने से पहले महाराष्ट्र पुलिस में कांस्टेबल थे। मुंबई पुलिस के एसीपी रहे शमसेर पठान ने पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद अवामी विकास पार्टी बनाई है।   


 

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