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कार्तिगाई दीपम : 6 नक्षत्रों का समूह, इस दिन हाेता है सबसे अधिक प्रबल

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 02nd, 2017 11:19 IST

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डिजिटल डेस्क, तमिलनाडु। यह महोत्सव श्रीलंका, केलर सहित तमिल मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह प्रतिमाह पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसलिए इसे कार्तिगाई पूर्णिमा कहा जाता है। साल में एक बार यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। वार्षिक कार्तिगाई उत्सव की धूम दीवाली के ही समान होती है। इसे भगवान मुरुगा की जयंती भी कहा जाता है। तमिल कैलेंडर के अनुसार कार्तिगाई का महीना (मध्य नवंबर से लेकर मध्य दिसंबर) तक होता है। 

नक्षत्र के नाम पर रखा गया

कार्तिगाई दीपम एक नक्षत्र के नाम पर रखा गया है। कहा जाता है कि उस दिन ये नक्षत्र बहुत प्रबल होता हैं। इसलिए इस दिन का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन तमिल परिवारों में घरों को दीपक से सजाया जाता है। यह नक्षत्र कान के एक लटकन के आकार में आकाश में छह सितारों के समूह के रूप में प्रकट होता है केरल में इस त्योहार को त्रिककर्ष्ठ के नाम से जाना जाता है। भारत के शेष हिस्सों में  कार्तिक पूर्णिमा को एक अलग तिथि पर मनाया जाता है। 

6 आकाशिय देवियां हैं ये 6 नक्षत्र 

इसे लेकर कई किवदंतियां भी प्रचलित हैं जिसके अनुसार ये 6 नक्षत्र 6 आकाशिय देवियां हैं जिन्होंने मिलकर भगवान कार्तिक का पालन किया था। इन्हें बाद में मुरुगा स्वामी के नाम से जाना गया। इसका उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है। एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव ने अपने पुत्र कार्तिक का निर्माण अपने तीसरे नेत्र से किया था। दक्षिण भारत में भगवान कार्तिक की 6 नामों से पूजा की जाती है। कथा के अनुसार भगवान कार्तिक के बड़े होते ही भगवान शिव आैर माता पार्वती उन्हें ले जाते हैं। जिसके बाद वे दुष्टों दानवों का वध करते हैं अाैर उन्हें देवताअों का सेनापति बनाया जाता है।

कार्तिगाई दीपम की तैयारियां घरों में लगभग एक माह पहले ही शुरू हाे जाती है। तमिलनाडु में इसकी खुशियां देखते ही बनती हैं। कार्तिगाई दीपम तमिल लोगों द्वारा मनाए गए सबसे पुराने त्योहारों में से एक है।

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