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Monsoon Shootout Review: नवाजुद्दीन की जबरदस्त वापसी और दर्शकों के लिए कन्फयूजिंग स्टोरी

December 22nd, 2017 19:05 IST
Monsoon Shootout Review: नवाजुद्दीन की जबरदस्त वापसी और दर्शकों के लिए कन्फयूजिंग स्टोरी

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  निर्देशक अमित कुमार ने रोबर्ट एनरिको की ऑस्कर विनिंग फिल्म 'An Occurrence at Owl Creek Bridge' से प्रेरित होकर बनाई गई फिल्म 'मानसून शूटआउट' आज रिलीज हो गई है। इस फिल्म में नवाजुद्दीन फिर से एक किलर के रूप में दिखाई देंगे। निर्देशक अमित कुमार की यह डेब्यू फिल्म है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराही गई है। आइए फिल्म की समीक्षा के जरिए जानते है कि नवाज कहां तक इस फिल्म से दर्शकों को थिएटरों तक खींचने में सफल हो पाते हैं। 

फिल्म का नाम: मानसून शूटआउट
निर्माताः गुनीत मोंगा
डायरेक्टर: अमित कुमार
स्टार कास्ट: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, विजय वर्मा, नीरज कबि, तनिष्ठा चैटर्जी, गीतांजलि, सृजिता डे
अवधि: 1 घंटा 32 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 2.5 स्टार

स्टोरी  

फिल्म की कहानी शूटर शिवा (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के ऊपर है जो सुपारी लेकर मर्डर करता है। वह एरिया के लोकल गुंडे सागर के लिए काम करता है। उसकी खोज में पूरा पुलिस डिपार्टमेंट जुटा रहता है, लेकिन शिवा किसी के हाथ नहीं लगता है। उसी समय पुलिस डिपार्टमेंट को आदि कुलश्रेष्ठ (विजय वर्मा) ज्वॉइन करता है। पहले दिन ही आदि की मुलाकात खान सर (नीरज कबि) से होती है, जिनसे वह काम के दांव पेंच सीखता है। आदि अपने पिता के बताए गए सिद्धांतों पर ही चलता है। जो सच, झूठ और उसके बीच होने वाले क्रियाकलापों के मद्देनजर है। फिल्म में भी जब आदि किलर शिवा को शूट करने के लिए जाता है तो उसके दिमाग में पिता के बातें चलती रहती हैं। इसी तरह तीन अलग-अलग तरह से कहानियां चलती जाती हैं। अंत में एक परिणाम आता है। क्या आदि किलर शिवा को मार देता है, या फिर गिरफ्तार कर लेता है यह देखने के लिए आपको सिनेमाघरों का रूख करना होगा।  

निर्देशन और पटकथा

फिल्म में कमाल की सिनेमेटोग्राफी की गई है, खासकर रात के सीन बेहतरीन फिल्माए गए हैं। राजीव रवि की इसके लिए तारीफ करनी पड़ेगी। फिल्म की कहानी कहने का ढंग हो सकता है कई दर्शकों के समझ में न आए। क्योंकि इस फिल्म की शूटिंग इंसान के सोचने के तरीके के मद्देनजर की गई है। दर्शक के तौर पर आपके सामने सवाल उठता है कि अभी तो ये इंसान जिंदा था, फिर अचानक से मौत कैसे हो गई। फिल्म फेस्टिवल्स के टिपिकल दर्शकों के लिए अच्छी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले और बढ़िया हो सकता था, वन लाइनर बहुत अच्छे हैं। 

अभिनय और बैकग्राउंड म्यूजिक


नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस फिल्म से एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऐसी डार्क क्राइम थ्रिलर फिल्मों में उनसे अच्छा कोई रोल नहीं कर सकता है। नवाजुद्दीन ने जबरदस्त एक्टिंग का मुजाहिरा पेश किया है। नीरज कबि जैसे अभिनेता की मौजूदगी को और भी कैश किया जाता तो मजा आ सकता था। विजय वर्मा ने पुलिस के किरदार में अच्छा काम किया है। फिल्म के बाकी कलाकार तनिष्ठा चैटर्जी, गीतांजलि, सृजिता डे ने भी सहज अभिनय किया है। फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका गाना 'पल' है, जिसे अरिजीत सिंह ने गाया है।


 

बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट 5 करोड़ से कम बताया जा रहा है, इस फिल्म की एक खास तरह की ऑडियंस है। 

क्यों देखें

अगर आप नवाजुद्दीन के फैन हैं तो यह फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए, या फिर आप क्राइम थ्रिलर फिल्में देखना पसंद करते हैं तो फिल्म आपके लिए बेहतरीन है। फिल्म के कुछ संवाद आपको आकर्षित करेंगे। जिनमें "जिंदगी में एक सही रास्ता होता है और दूसरा गलत रास्ता। एक तीसरा रास्ता भी होता है... फिल्मीवाला!", ‘मुझे लगता है कोई फैसला लेने के लिए हमारे पस बहुत वक्त होता है, लेकिन होता है सिर्फ एक पल’। कहानी में नया मोड़ लाता है।

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