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नक्सलियों के मददगार आरोपी प्रो. साईबाबा का मेडिकल में उपचार

नक्सलियों के मददगार आरोपी प्रो. साईबाबा का मेडिकल में उपचार

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नक्सलियों की मदद के आरोप में दोषी करार दिए गए प्रो. जी एन साईबाबा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा उन्हें गडचिरोली की जिला अदालत ने सुनाई है। वह नागपुर के सेंट्रल जेल के अंडा सेल में बंद हैं। वह यहां उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने जमानत के लिए अदालत में अर्जी दी है। सोमवार को उन्हें सेंट्रल जेल से मेडिकल के सुपर स्पेशालिटी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था, चर्चा है कि जब से उन्हें सजा सुनाई गई है तब से काफी तनाव में रहते हैं, वह जेल में भी गुमसुम से रहते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रो साईबाबा को सुपर स्पेशालिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जन विभाग में भेजा गया था। इस दौरान अस्पताल परिसर में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया था। हथियारों से लैस जवानों को परिसर में तैनात देखकर नागरिकों में कई तरह की चर्चाएं हो रही थी कि इतना भारी बंदोबस्त क्यों है। चर्चाओं को तब विराम लगा जब नागरिकों को पता चला कि नक्सलियों के मददगार दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो जी एन साईबाबा को सेंट्रल जेल से इलाज के लिए सुपर स्पेशालिटी अस्पताल में भेजा गया है। इलाज के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। उन्हें लेकर आए पुलिस जवानों ने चर्चा के दौरान बताया कि सेंट्रल जेल के कैदी प्रो साईबाबा को नियमित जांच के सिलसिले में अस्पताल में लाया गया था।

सूत्र बताते हैं कि वह इन दिनों कुछ तनाव में जी रहे हैं, जिसके चलते उन्हें न्यूरोसर्जन विभाग में लाया गया था। गडचिरोली की जिला अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रोफेसर जीएन साईंबाबा और पांच अन्य लोगों को नक्सलियों की मदद के आरोप में दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जीएन साईंबाबा और पांच अन्य लोगों को यूएपीए एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। आजीवन कारावास की सज़ा पाने वालों में दो अन्य लोग महेश तिर्की और पांडु नरोटे हैं। इसके अलावा कोर्ट ने छठे आरोपी विजय तिर्की को 10 साल की सज़ा सुनाई गई है। उन्हें आतंकवादी समूह या संगठन का सदस्य होने तथा किसी आतंकवादी संगठन को समर्थन देने के अपराध से संबंधित गैर कानूनी गतिविधियां (निवारक) कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। यहां उल्लेख कर दें कि डीयू प्रोफेसर के सरकारी आवास पर 2013 में महाराष्ट्र पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने छापा मारा था। साईं बाबा का नाम उस वक्त सामने आया, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक छात्र हेमंत मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। उस समय हेमंत मिश्रा ने दिल्ली में अपने संपर्क के रूप में प्रोफेसर साईंबाबा का नाम लिया था। गढ़चिरोली की उक्त अदालत ने नक्सलियों के साथ संबंध रखने के आरोप में प्रो साईबाबा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वर्ष 2014 में उन्हें नक्सलियों को समर्थन देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। मई 2014 में साईबाबा के साथ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र हेमंत मिश्रा और पूर्व पत्रकार प्रशांत राही समेत पांच लोग गिरफ्तार किए गए थे।

आंध्र प्रदेश के एक गरीब परिवार में जी.एन. साईबाबा पैदा हुए थे। सूत्र बताते हैं कि 2003 में दिल्ली आने से पहले उनके पास व्हीलचेयर खरीदने के भी पैसे नहीं थे, लेकिन पढ़ाई में हमेशा से वह काफी तेज थे, साईंबाबा 9 मई, 2014 में गिरफ्तार होने से पहले राम लाल कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। उनकी लव मैरिज हुई थी। उनकी मुलाकात उनकी पत्नी वसंत से एक कोचिंग क्लास में हुई थी। अखिल भारतीय पीपुल्स रेजिस्टंस फोरम (एआईपीआरएफ) के एक कार्यकर्ता के रूप में, उन्होंने कश्मीर और उत्तर पूर्व में मुक्ति आंदोलनों के समर्थन में दलित और आदिवासी अधिकारों के लिए प्रचार करने के लिए 2 लाख किमी से अधिक की यात्रा की थी। नागपुर की सेंट्रल जेल में उन्हें उसी अंडा जेल में 14 महीने तक रखा गया था। जहां बम धमाके के एक आतंकी को कैद करके रखा गया था। इस जेल को देश की सबसे खतरनाक जेलों में से एक में गिना जाता है। साईबाबा पर शहर में रहकर माओवादियों के लिए काम करने का आरोप है।

क्रांतिकारी डेमोक्रेटिक फ्रंट माओवादियों का गुट है। इन पर इस गुट के सदस्य होने का आरोप था। हालांकि खुद उन्होंने हमेशा ही माओवादियों का साथ देने के आरोप को झूठा बताते रहे हैं। साईबाबा की जमानत 14 महीने में 4 बार खारिज हुई थी। हालांकि जून 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत मिली थी। वे सितंबर 2009 में तत्कालीन सरकार के शुरू किए गए ऑपरेशन ग्रीन हंट में पकड़े गए थे। माओवादियों पर काबू पाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू हुआ था। प्रोफेसर साई बाबा को महाराष्ट्र पुलिस ने जब गिरफ्तार किया था। उस समय उनकी गिरफ्तारी पर दिल्ली में वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने काफी विरोध किया था। लेकिन पुलिस का दावा था कि साईबाबा प्रतिबंधित संगठन भाकपा-माओवादी के सदस्य हैं और उनको इस संगठन को सामान मुहैया कराने और उसमें भर्ती करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जेएनयू के छात्र हेमंत मिश्रा ने पुलिस की पूछताछ में प्रो साईबाबा के नाम का खुलासा किया था कि वह छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में छिपे माओवादियों और प्रोफेसर के बीच ‘कूरियर’ का काम करता है।

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