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मानसून की बारिश से बदल गई प्रकल्पों की तस्वीर, लबालब डैम से छोड़ा जा रहा पानी

मानसून की बारिश से बदल गई प्रकल्पों की तस्वीर, लबालब डैम से छोड़ा जा रहा पानी

डिजिटल डेस्क,अमरावती। संभाग के सबसे बड़े प्रकल्प उध्र्व वर्धा के लिए इस वर्ष मानसून की बारिश वरदान साबित हुई है। पूरे दो वर्ष बाद यह प्रकल्प लबालब हुआ है। वहीं चार माह पूर्व 31 मई को उध्र्व वर्धा प्रकल्प में मात्र 14.47 फीसदी पानी शेष था। हालांकि जून के दूसरे सप्ताह में प्रकल्प का जलभंडारण 11 फीसदी तक पहुंच गया था। किंतु मानसून के दौरान पिछले दो माह में हुई जमकर बारिश ने उध्र्व वर्धा सहित सभी प्रकल्पों की तस्वीर बदल  गई है। जलसंपदा विभाग की 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार उध्र्व वर्धा प्रकल्प में 100 फीसदी जलसंग्रह हुआ है। विगत 9 सितंबर से इस प्रकल्प के गेट कम-ज्यादा प्रमाण में खोले गए। वर्तमान स्थिति में प्रकल्प के दो गेट में से पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा शहानूर प्रकल्प में 96.37 फीसदी जलसंग्रह, चंद्रभागा प्रकल्प में 96.58 फीसदी जलसंग्रह, पुर्णा प्रकल्प में 91.81 फीसदी जलसंग्रह व सपन में 96.27 फीसदी जलसंग्रह हो चुका है। इन प्रकल्पों से भी गेट के जरिए रोजाना पानी छोड़ा जा रहा है।

गौरतलब है कि ग्रीष्मकाल के दौरान 31 मई को इन प्रकल्पों की स्थिति दयनीय हो चुकी थी। हालांकि जून में मानसून का आगमन नहीं होने की वजह से यह प्रकल्प पूरी तरह सूखने की कगार पर थे। पिछले 30 वर्षों में पहली बार उध्र्व वर्धा प्रकल्प में मात्र 11 फीसदी जलसंग्रह शेष था। जिसकी वजह से पहली बार प्रकल्प में गए गांव के मंदिर व मकानों के अवशेष खुले दिखाई दे रहे थे। अन्य प्रकल्पों की स्थिति भी बिकट थी। जिससे इस वर्ष जून में अच्छी बारिश की दुआएं मांगी जा रही थी। जो मानों कबूल हो गई। बारिश का जोर इतना रहा कि सभी प्रकल्प लबालब होने के साथ ही गेट से पानी छोडऩे की प्रक्रिया निरंतर शुरू है।

अपेक्षा से अधिक बारिश

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमरावती जिले में जून से सितंबर इन चार माह में मानसून के दौरान 814.5 मिमी औसतन बारिश अपेक्षित है। किंतु इस वर्ष प्रत्यक्ष रुप में अपेक्षा से अधिक 890.2 मिमी बारिश इन चार माह में दर्ज की गई है। जिले में सर्वाधिक बारिश चिखलदरा में 1951.2 मिमी दर्ज की गई। वहीं धारणी में 1481.2 मिमी, चांदूर बाजार में 1067.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले के अन्य स्थानों में भी कम-ज्यादा प्रमाण में बारिश का प्रभाव रहा।

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