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टाइगर साहेबराव की सर्जरी, शीघ्र लगेगा कृत्रिम पंजा, शिकारियों के जाल में फंसकर हो गया था घायल

टाइगर साहेबराव की सर्जरी, शीघ्र लगेगा कृत्रिम पंजा, शिकारियों के जाल में फंसकर हो गया था घायल

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर के गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर में रह रहे 9 साल के नर बाघ साहेबराव को जल्द कटे पंजे के दर्द से निजात मिल सकती है। शिकारियाें के फंदे में फंसने के कारण पंजा गंवा चुके साहेबराव को कृत्रिम पंजा लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस क्रम में बुधवार, 9 अक्टूबर को न्यूरोमा और ऑर्थराइटिस का उपचार और पंजे के आकार के लिए नाप लिया गया। प्रक्रिया लगभग आधे घंटे चली। इसके लिए डॉ. गौतम भोजाने ने साहेबराव को बेहोश किया और डॉ. शिरीष उपाध्याय के नेतृत्व में डब्ल्यूआरटीसी के वेटनरी डॉक्टरों की टीम ने कार्य पूर्ण किया। 

आधा घंटा चली सर्जरी

साहेबराव के उपचार के लिए सर्जरी आधा घंटा तक चली। ऑपेशन के दौरान डॉ. विनोद धूत, डॉ. गौतम भोजने, डॉ. मयूर पाश्वे, डॉ. शालिनी, डॉ. सुजित ने प्रक्रिया पर पूरी नजर रखी। गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर के नंदकिशोर काले व उनकी टीम ने ऑपरेशन के लिए जरूरी संसधान जुटाने में सहयोग किया। एमएफडीसी के प्रबंध निदेशक रामबाबू और पीसीसीएफ  वाइल्ड लाइफ डॉ. नितिन काकोदर भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि साहेबराव को कृत्रिम पंजा लगाने का ऑपरेशन नागपुर के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर के नेतृत्व में किया जा रहा है।

शिकारियों के जाल में फंस गया था

पिछले वर्ष दुनियाभर के डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद नागपुर के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर ने साहेबराव को कृत्रिम पंजा लगाने का निर्णय लिया है। उसे सिलिकॉन से बना कृत्रिम पैर लगेगा। उन्होंने साहेबराव को गोद भी लिया है। वर्ष 2012 में साहेबराव शिकारियों के निशाने पर आ गया था। पलसगांव में 2008 में दो साल का साहेबराव और उसका भाई जंगल में एक फंदे में फंस गए थे। फंदे ने साहेबराव के भाई की जान ले ली। साहेबराव बच तो गया, लेकिन उसका एक पंजा काटना पड़ा। इससे पैर की रक्त कोशिकाओं में कुछ विकृति पैदा हो गई, जिसने उसे न्यूरोमा की पीड़ा का शिकार बना दिया। 

उपचार से मिलेगी राहत

कृत्रिम पंजा लगाने से पूर्व साहेबराव को दर्द से राहत दिलाने के लिए उपचार शुरू किया गया है। उसके लिए पंजे का माप भी लिया गया है। अगले एक माह में उसे पंजा लगाया जा सकता है। -नंदकिशोर काले, एसीएफ गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर
 

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