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महीनों अपडेट नहीं होती वेबसाइट,आईटी रिफॉर्म पर यूनिवर्सिटी उदासीन

महीनों अपडेट नहीं होती वेबसाइट,आईटी रिफॉर्म पर यूनिवर्सिटी उदासीन

हाईलाइट

  • विद्यार्थियों को हाेने वाली परेशानी पर भी खुल कर चर्चा हुई

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आईटी रिफॉर्म की ओर अग्रसर होने का दावा करने वाले राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय प्रशासन की कलई तब खुल गई, जब सीनेट की बैठक में डिजिटाइजेशन के प्रति उदासीन रवैया सामने आया। डिजिटाइजेशन को नहीं अपनाने के कारण विद्यार्थियों को हाेने वाली परेशानी पर भी खुल कर चर्चा हुई। सीनेट सदस्य एड. मनमोहन बाजपेयी ने मुद्दा उठाया कि विद्यार्थियों से सभी प्रकार के फॉर्म, आवेदन और उनकी फीस ऑनलाइन स्वीकार करना शुरू कर दिया है, लेकिन नागपुर विश्वविद्यालय में ऐसा कोई प्रबंध नहीं है।

मौजूदा प्रणाली के अनुसार  यूनिवर्सिटी के नागपुर में रहने वाले स्थानीय विद्यार्थी तो परीक्षा भवन पहुंचकर यह कार्रवाई पूरी कर सकते हैं, लेकिन नागपुर के बाहर के विद्यार्थियों को इतने से काम के लिए नागपुर आना पड़ता है। कई बार तो आवेदन और 200 रुपए फीस भरने के लिए बाहरी विद्यार्थियों को 500 और 1000 रुपए खर्च करके परीक्षा भवन पहुंचना पड़ता है, जबकि उनकी यह जद्दोजहद बच सकती है, यदि नागपुर यूनिवर्सिटी ऑनलाइन फॉर्म और फीस स्वीकारना शुरू कर देता है।

इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा भवन में मौजूद विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को भी डिजिटाइज करने का मुद्दा उठाया। एड. बाजपेयी के इस प्रस्ताव को अन्य सीनेट सदस्यों ने भी सहमति दी। जिसके बाद नागपुर यूनिवर्सिटी ने इस पर हामी भरी। योजना के कार्यान्वयन के लिए एक समिति गठित की गई है।

सही जानकारी नहीं मिल पाती
दशकों पुराने नागपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को मामूली सूचना प्राप्त करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। एडमिशन, परीक्षा, प्लेसमेंट या दस्तावेज तैयार करने के लिए क्या करना है, कहां जाना है, किससे संपर्क करना है? यह जानकारी प्राप्त करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। एड. बाजपेयी ने मुद्दा उपस्थित किया कि यह एकदम मामूली जानकारी है, जिसे वेबसाइट पर सहजता से मिल जाना चाहिए, लेकिन विवि की अधिकृत वेबसाइट महीनों अपडेट नहीं रहती।

विवि ने विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए कोई सूचना केंद्र या कियॉस मशीन भी नहीं लगाई है। ऐसे में जरूरी है कि, विद्यार्थियों को वेबसाइट पर ही पूरी जानकारी मिले। वेबसाइट अपडेट करने के लिए विद्यार्थी, शिक्षक, विशेषज्ञों और अन्य घटकों से मार्गदर्शन मांगा जाना चाहिए। सीनेट ने इसे मंजूर करते हुए एक अलग समिति को अध्ययन का काम सौंपा है।

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