Assam News: कैबिनेट मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद हिमंत सरकार ने आज विधानसभा में पेश किया UCC विधेयक, यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा असम

डिजिटल डेस्क, भोपाल। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने आज सोमवार 25 मई को विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक को पेश कर दिया है। राज्य सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद विधेयक को पेश किया है। UCC बिल पर भाजपा विधायक बिस्वजीत दैमारी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा इसे इसी सत्र में पेश किया जाएगा और फिर पास कर दिया जाएगा। इसके बाद इसे राज्य में लागू किया जाएगा। विधेयक में पांच मुख्य आधार बताए जा रहे है।
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असम विधानसभा से यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश में UCC विधेयक पारित करने वाला तीसरा प्रदेश बन जाएगा। साल 2024 में उत्तराखंड ने सबसे पहले यूसीसी लागू किया था। वह संविधान के नीति निदेशक तत्वों के तहत ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना था। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।
सरमा सरकार के मुताबिक, विधेयक के मसौदे को असम की विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल तैयार किया गया है। यह नया कानून मुख्य रूप से नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियमित करेगा। जिसमें लिव-इन का कानूनी हिसाब,शादी की समान उम्र, बहुविवाह का खात्मा, तलाक और निकाह का पंजीकरण,बेटियों को बराबर का हक जैसे विषय शामिल है।
असम की सरमा सरकार में संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 पेश किया। विधेयक को चर्चा के बाद पारित कर दिया जाएगा। असम विधानसभा में UCC विधेयक पेश किए जाने का विपक्षी विधायकों ने जमकर विरोध किया है। विपक्ष ने इसे लेकर कहा इसे प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
आपको बता दें 13 मई को सीएम सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट मीटिंग हुई थी। तब राज्य सरकार ने 21 से 26 मई तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान इसे लाने का ऐलान किया था। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए सीएम ने कहा कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसे इसी सत्र में पेश किया जाएगा।
इस कानून के बाद असम में क्या होगा
लिव-इन का कानूनी हिसाब: बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य।
तलाक और निकाह का पंजीकरण: सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा।
बहुविवाह का खात्मा: राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लगेगी।
शादी की समान उम्र: विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होना।
बेटियों को बराबर का हक: पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार।
Created On :   25 May 2026 12:01 PM IST







