MP News: पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने पेश किया 2 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड, बोलीं - 'मैंने भी सिर पर पानी ढोया, अब नल-जल ने ग्रामीण महिलाओं का...'

पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने पेश किया 2 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड, बोलीं - मैंने भी सिर पर पानी ढोया, अब नल-जल ने ग्रामीण महिलाओं का...
मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) मंत्री संपतिया उइके ने मंगलवार को विभाग के दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक किया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) मंत्री संपतिया उइके ने मंगलवार को विभाग के दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पेयजल को नागरिकों का मूल अधिकार माना और जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का काम प्रभावी रूप से किया। इससे दाे साल में न केवल भौतिक उपलब्धियां हासिल की, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव भी किया है। संपतिया ने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि मैं खुद भी ऐसे गांव से आती हूं, जहां की महिलाएं दूर-दूर से पानी सिर पर ढोती है। महिलाओं के सिर के बाल तक निकल जाते थे। मैंने भी सिर पर पीने का पानी ढोया है। लेकिन अब ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव देखा गया है। घर-घर नल से जल पहुंचने से महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के 81 लाख 21 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन से शुद्ध पेयजल दिया जा रहा है। यह कुल लक्षित परिवारों का लगभग 73 प्रतिशत है। प्रदेश के 10 हजार 440 ग्रामों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है और भारत सरकार द्वारा बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित करना गौरव का विषय है।

नल-जल के कारण महिलाएं जुड़ी स्वरोजगार से

मंत्री संपतियां ने कहा कि दो साल में 13 लाख 69 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन दिए गए। पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर 64 ग्रामों में 24x7 जल की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि नल जल योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव किया है। पहले महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने में समय खर्च करना पड़ता था। नल जल के कारण समय की बचत होने से महिलाएं दूसरे स्वरोजगार और अन्य आजीविका के काम कर रही है, जिससे उनके जीवन में आर्थिक बदलाव भी हुआ है। महिलाओं के पास समय होने से अब वे पार्लर, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, किराना दुकान जैसे स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। इससे आजीविका के नए साधन बने और वे आर्थिक संपन्न हो रही है।

उन्होंने कहा कि घर में पानी पहुंचने से बालिकाओं को पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। इससे स्कूलों में अिधक उपस्थिति दर्ज की गई। जेजेएम केवल जल आपूर्ति की योजना नहीं, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा और ग्रामीण समाज की समग्र प्रगति का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

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Created On :   25 Dec 2025 9:57 PM IST

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