विशेष सत्र: महिला आरक्षण बिल पर पक्ष- विपक्ष के नेताओं के बयान, एक दूसरे पर जमकर हमला बोला

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पर कहा ये केवल परिसीमन बिल नहीं है बल्कि संविधान का संशोधन है। उसमें ये चाहते हैं कि पहले परिसीमन हो और उसके बाद तय किया जाए कि कौन सा महिला आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने 2023 का संवैधानिक संशोधन तो रद्द कर दिया जो सर्वसम्मित से पास हुआ था। उसमें यही था कि 2026 के बाद जनगणना होगी, उसके बाद परिसीमन होगा और फिर तय किया जाएगा कि महिला आरक्षण होगा। फिर वो उन्होंने रद्द क्यों किया? क्या वे नहीं चाहते कि जनगणना हो? संविधान संशोधन का उनका ही प्रस्ताव था। ये लोग ऐसा नहीं चाहते क्योंकि वे ऐसा कर ही नहीं सकते। वे समझते हैं कि वे हर समय देश की जनता को गुमराह कर सकते हैं, 2011 के बाद कोई और जनगणना नहीं हुई है। उसके आधार पर उन्होंने ये भी नहीं बताया कि कितनी सीटें बढ़ाएंगे। इनका मकसद है कि पहले तो किसी और के कंधे पर बैठकर सरकार बनाओ और फिर उन्हें खत्म करो, निश्चित रूप से वे(भाजपा) सोचते हैं कि हिंदी बेल्ट में उनका प्रभाव ज्यादा है और दक्षिण में अगर 66 सीटें बढ़ भी गईं तो क्या ही फर्क पड़ेगा लेकिन हम इसे पास नहीं होने देंगे।
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महिला आरक्षण बिल पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा मुझे लगता है कि परिसीमन का विरोध करना ठीक नहीं है। परिसीमन के बाद ही सीटें बढ़ने वाली है। परिसीमन से ही महिलाओं को आरक्षण मिलने वाला है...सभी सांसदों को काम करने के लिए अच्छा मौका मिलेगा। विधानसभा में भी सीटें बढ़ने वाली है। सुझाव रखने का सभी का अधिकार है लेकिन बिल का विरोध करना महिला विरोधी स्टैंड है।
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महिला आरक्षण बिल पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा ये मांग दशकों पुरानी रही है। महिला आरक्षण देना जरूरी है। ऐसे में अलग-अलग कालखंड में अलग-अलग विषयों के आधार बनाते हुए मेरी समझ के परे है कि क्यों नारी शक्ति को उनके इन अधिकारों से वंचित रखने का काम किया जा रहा है। कभी आरक्षण के भीतर आरक्षण को आधार बनाया जाता है कभी सीटों की संख्या को आधार बनाया जा रहा है। पहले सबने इसे पारित करने का काम किया अब लागू करने के समय विपक्ष विरोध कर रहा है।
Created On :   16 April 2026 4:30 PM IST












