पश्चिम बंगाल पॉलिटिक्स: ममता बनर्जी की करीबी माने जाने वाली सयानी घोष ने छोड़ा साथ! 20 बागी गुट के साथ हुई शामिल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में इस वक्त ममता बनर्जी बड़े दौर से गुजर रही है। राज्य में विधानसभा चुनाव हारने के बाद टीएमसी के नेता बगावत पर उतर आए। वह एक एक करके पार्टी छोड़ रहे हैं। इसी सिलसिले में ममता बनर्जी को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है। कभी ममता बनर्जी की सबसे खान माने जाने वाली सयानी घोष भी अब टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों में शामिल हो गई हैं। जिन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावती सुर अपना लिए हैं।
यह भी पढ़े -क्या कांग्रेस में शामिल होगी तृणमूल कांग्रेस? अटकलों के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने किया बड़ा दावा
टीएमसी नेता सयानी घोष ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ
रिपोर्ट्स की मानें तो, कभी बीजेपी के खिलाफ आवाज उठाने वाली सयानी घोष राजनीति से यू-टर्न लेने जा रही है। वह टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों के गुट में शामिल होने जा रही हैं जो एनडीए सरकार को समर्थन देने का विचार कर रहे हैं। इस गुट की नेता काकोली घोष हैं। जो बीजेपी में शामिल होने जा रही हैं।
बता दें, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सयानी घोष ने बीजेपी के खिलाफ जोरदार प्रचार किया था। इस वजह से वह चुनाव में काफी चर्चा में रही थी। इतनी ही नहीं, बल्कि पार्टी के बाहर उनके अंदर ममता बनर्जी की छवि देखी गई थी। सयानी घोष का ममता बनर्जी के लिए गीत 'एकबार छेड़े दे नौका माझी, जाबो मदीना।।। आमार हृदय माझे काबा, नयाने मदीना।' काफी चर्चा में रहा। बीजेपी ने इसे ध्रुवीकरण करने वाला बताया था। इस पर बीजेपी ने ध्रुवीकरण करने वाला बताया था।
यह भी पढ़े -मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर मंगल पांडेय ने दी बधाई, बोलें, 'प्रधानमंत्री ने हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया'
राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने पर दी थी तीखी प्रतिक्रिया
वहीं, इससे पहले सयानी घोष ने राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद इंटरव्यू में प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, "चड्ढा चड्डी बन सकता है, लेकिन घोष हमेशा घोष रहेगा।" इस दौरान बीजेपी ने उन पर सिख और पंजाबी समुदायों का अपमान करने का आरोप लगाया था। सयानी घोष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी में शामिल हुईं। बीजेपी को निशाना बनाते हुए अपने जोशीले भाषणों और ममता बनर्जी के लिए अपने मजबूत जनसमर्थन के कारण जल्दी ही पार्टी की सबसे प्रमुख प्रचारकों में से एक बन गईं।
पिछले हफ्ते ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 58 ने खुलकर बगावत कर दी और बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल बनने का दावा किया। पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले बुधवार को ऋतब्रता बनर्जी (3 जून 2026) को पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी। वहीं, सांसद काकोली घोष ने सोमवार (8 जून 2026) को एनडीए को समर्थन देते हुए दावा किया।
Created On :   10 Jun 2026 10:17 PM IST












