Syed Naseruddin Chishty on Bhagwat Statement: 'इस्लाम यहां था.. है..और आगे भी रहेगा', मोहन भागवत के बयान पर बोले अजमेर दरगाह के दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्नती

इस्लाम यहां था.. है..और आगे भी रहेगा, मोहन भागवत के बयान पर बोले अजमेर दरगाह के दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्नती
  • मोहन भागवत के इस्लाम को लेकर दिया बयान चर्चा में
  • अजमेर दरगाह के दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्नती ने किया समर्थन
  • आरएसएस के कार्यों की तारीफ की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में अपनी तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के आखिरी दिन इस्लाम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में इस्लाम हमेशा एक स्थान रहेगा। इसके साथ ही संघ प्रमुख ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपसी विश्वास बनाए रखने की भी बात की। उनके इस बयान को काफी चर्चा हो रही है।

अब राजस्थान के अजमेर की विश्व प्रसिद्ध दरगाह के दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्नती ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भागवत ने सारी शंकाओं को दूर करते हुए बड़े साफ शब्दों में कहा है कि इस्लाम भारत में था, है और भविष्य में भी रहेगा। लेकिन हम सभी हिंदुस्तानियों को अपने महजब के साथ-साथ अपने मुल्क के लिए भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। मेरा मानना है कि भागवत ने भी इसी को लेकर बयान दिया था जिसे सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा, "देश का राजनीतिक परिदृश्य यही रहा है कि मुसलमानों को हमेशा किसी न किसी का डर दिखाकर उनके वोट को लेने की कोशिश की गई है। चाहे वो किसी के भी द्वारा की गई हो। लेकिन पिछले 10 सालों से बीजेपी की सरकार है और आरएसएस भी देश के लिए काम कर रही है। अब मुसलमानों की सोच बदली है।"

उन्होंने आगे कहा, "ये बात बिल्कुल सही है कि इस देश में मुसलमान हो या कोई हो, किसी को किसी से डरना नहीं चाहिए। हमें संवैधानिक अधिकार के लिए तत्पर भी रहना चाहिए. लेकिन जिस तरीके से डर दिखाया गया था वो डर बिल्कुल बेमाने हैं। आज चाहे भारत सरकार हो चाहे आरएसएस हो, ये सब देशहित में सबको साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे हैं ताकि देश तरक्की करे और मजबूत हो।"

वहीं संघ प्रमुखे काशी मथुरा वाले बयान पर उन्होंने कहा कि "इस देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। धार्मिक उन्माद भी बहुत हुआ है। हमें ऐसी राह अग्रसर करनी चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी को एक साफ और सुरक्षित माहौल मिले जिससे की देश तरक्की कर सके। हम कब तक धार्मिक मामलों को लेकर उलझे रहेंगे? हम मजहब से अलग-अलग हैं। हमारी पूजा पद्धति अलग है लेकिन हम लोग हैं हिंदुस्तानी और कयामत तक हिंदुस्तानी ही रहेंगे। अगर कई मामले बैठने से सुलझ जाते हैं तो उनको बैठकर सुलझाना चाहिए. इसमें कोई बुराई नहीं है।" बता दें कि भागवत ने कहा था कि संघ काशी और मथुरा जैसे अभियान का समर्थन नहीं करेगा।

Created On :   29 Aug 2025 9:32 PM IST

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