comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सभी मंत्रालय फुलप्रूफ रणनीति से जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे आर्थिक पैकेज का लाभ

May 18th, 2020 16:30 IST
 सभी मंत्रालय फुलप्रूफ रणनीति से जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे आर्थिक पैकेज का लाभ

हाईलाइट

  • सभी मंत्रालय फुलप्रूफ रणनीति से जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे आर्थिक पैकेज का लाभ

नई दिल्ली, 18 मई(आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर सोमवार को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स(जीओएम) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोपहर सवा 12 बजे से शुरू हुई बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आदि केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में केंद्र सरकार से घोषित 20 लाख करोड़ के भारी भरकम आर्थिक पैकेज को जनता तक सही से पहुंचाने को लेकर रणनीति बनी।

सूत्रों ने बताया कि मंत्री समूह की बैठक में तय हुआ कि पैकेज में जिन-जिन मंत्रालयों से जुड़ी घोषणाएं हैं, उसको लेकर वे जनता को जागरूक करते हुए जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने की रणनीति बनाएंगे ताकि आर्थिक पैकेज से जुड़ी मोदी सरकार की मंशा सफल हो सके।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर, एस जयशंकर, हरदीप सिंह पुरी, अनुराग ठाकुर आदि केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में यह भी कहा गया कि पैकेज से जुड़े सभी हितधारकों से भी मंत्रालय संवाद करें और उनसे सही तस्वीर पेश करें। जनता के बीच पैकेज को आसान भाषा में बताना होगा ताकि सभी को लाभ मिल सके। मंत्रिसमूह की बैठक में सभी मंत्रालयों को आर्थिक पैकेज को धरातल पर उतारने के लिए फुलप्रूफ प्लानिंग बनाने का निर्देश जारी हुआ है।

बता दें कि मोदी सरकार ने आर्थिक संकट से हर वर्ग को उबारने के लिए देश की जीडीपी का दस प्रतिशत यानी 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज घोषित किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले पांच दिनों से एक-एक कर सभी सेक्टर के लिए पैकेज के बारे में जानकारी दी। इसमें गांवों से लेकर उद्योग जगत के लिए कई राहत भरी घोषणाएं शामिल हैं।

गांवों में मनरेगा से रोजगार बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने बजट 40 हजार करोड़ बढ़ाने की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, हवाई अड्डे, विद्युत वितरण, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा जैसे आठ सेक्टर के निजीकरण का भी ऐलान किया। मंत्री समूह की इस बैठक में केंद्र सरकार की ओर से अब तक घोषित राहत उपायों की समीक्षा भी हुई।

कमेंट करें
5Gy9P
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।