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सोनिया के करीबी रहे वडक्कन को भा गई भाजपा, बोले- यहां नहीं पूछा जाता कि पिता जी कहां के राजा थे

October 15th, 2019 19:30 IST
 सोनिया के करीबी रहे वडक्कन को भा गई भाजपा, बोले- यहां नहीं पूछा जाता कि पिता जी कहां के राजा थे

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर(आईएएनएस)। कभी सोनिया गांधी के करीबी रहे और कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव के साथ प्रवक्ता की दोहरी जिम्मेदारियां निभा चुके टॉम वडक्कन को भाजपा में आए छह माह से ज्यादा हो चुके हैं। अब वह भाजपा की राजनीति में रम चुके हैं। इतने महीने में कांग्रेस बनाम भाजपा को लेकर क्या समझ बनी? वह कहते हैं, यहां(भाजपा) काम करने में आनंद आ रहा है, क्योंकि यहां डायनेस्टी(परिवारवाद) नहीं, मेरिट(योग्यता) को तवज्जो दी जाती है। यहां कोई यह नहीं पूछता कि आपके पिता कहां के राजा थे या रानी।

केरल से निकलकर दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति करने वाले टॉम वडक्कन की गिनती कभी कांग्रेस में सोनिया खेमे के नेताओं में होती थी। यही वजह रही कि दो दशक से लगातार वह मीडिया में कांग्रेस का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेता रहे और उन्हें कांग्रेस में महासचिव जैसा पद भी मिला था।

मगर साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मार्च में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस के रुख की आलोचना करते हुए उनके पार्टी छोड़ने के बाद नाराज हुए राहुल गांधी ने तब उन्हें छोटा नेता बताया था।

कांग्रेस और भाजपा में क्या फर्क है? वडक्कन ने आईएएनएस से कहा कि जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने कहा, यहां टीम भावना से काम होता है, काबिलियत को प्राथमिकता दी जाती है। यहां एक सिस्टम है, जिसमें काम करने की अपनी चुनौतियां भी हैं। मगर जब कार्यकर्ताओं की योग्यता देख जिम्मेदारियां दी जाती हैं तो उनका मनोबल भी बढ़ता है। यहां डायनेस्टी सेटअप नहीं है।

राहुल गांधी के बारे में उन्होंने कहा कि वह (राहुल) जनाधार खो चुके हैं। जब तक जनाधार नहीं आता तब तक उन्हें संघर्ष करना चाहिए। देश को एक सशक्त विपक्षी दल की जरूरत है, मगर राहुल जिम्मेदारी निभा ही नहीं रहे हैं।

टॉम ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों का विश्वास लेकर काम करती है।

कांग्रेस और भाजपा की विचारधारा में मूल अंतर के सवाल पर उन्होंने कहा, कांग्रेस विचारधारा को लेकर बहुत कुछ बोलती है, मगर हकीकत में वहां इसके नाम पर कुछ नहीं है। भाजपा देश प्रेम की विचारधारा को लेकर बहुत प्रतिबद्ध है। भाजपा की देशभक्ति की राजनीति देश को जोड़ने का काम करती है, यहां देश को तोड़ने का काम नहीं होता।

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