उपचुनाव 2022: आजमगढ़ में निरहुआ के सामने नहीं टिक पाए धर्मेंद यादव, सपा का किला ढहा 

June 26th, 2022

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सपा का किला ढहा कर अपना परचम लहराया है। बीजेपी ने पार्टी से भोजपुरी कलाकार दिनेश लाल यादव निरहुआ को अपना उम्मीदवार बनाया था। जबकि समाजवादी पार्टी ने धर्मेंद यादव व बसपा ने स्थानीय नेता गुड्डू जमाली को मैदान में उतारा था। यूपी की सियासत में चुनाव छोटा हो या फिर बड़ा गरमी हमेशा देखने को मिलती है। इस बार भले ही लोकसभा उपचुनाव हो रहा था लेकिन दिल्ली से चुनाव की निगरानी की जा रही थी। एक तरफ जहां अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी तो वहीं दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ। हालांकि बीजेपी ने लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल कर बड़ा संदेश दिया कि आज भी जनता मोदी और योगी के कामों पर भरोसा कर रही है। 

आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव की सीट पर यही कयास लगाए जा रहे थे कि टक्कर बीजेपी और सपा के बीच है। लेकिन यह भी बताया जा रहा था कि इन दोनों के जीत में बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कुछ ऐसे ही आज के चुनाव परिणाम में देखने को मिला है। चुनाव आयोग के मुताबिक, लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल निरहुआ को 312768 मत मिले, तो वहीं धर्मेंद्र यादव को 304089 और गुड्डू जमाली को 266210 मत मिले हैं। जबकि 4,732 वोट नोटा पर गया है। बीजेपी प्रत्याशी निरहुआ ने अपने निकटम प्रतिद्वंदी अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद यादव को 8500 से ज्यादा मतों से हराकर सपा के किले में सेंध लगा दी है। 

हार का लिया बदला

गौरतलब है कि बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने 2019 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के सामने चुनाव लड़ा था। लेकिन अखिलेश के सामने निरहुआ टिक नहीं पाए और बुरी तरह से उस चुनाव में हारे थे। इस लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी के चुनावी समीकरण के सामने आजमगढ़ में सपा का किला भरभराकर गिर गया है। माना जा रहा है कि बीजेपी के लिए आने वाले 2024 लोकसभा चुनाव में राहें आसान होने वाली है। यहां से पूर्वांचल फतह करना बीजेपी के लिए काफी आसान हो जाएगा। जानकारों की मानें तो इस बार जनता ने एक बार फिर से महंगाई और बेरोजगारी मुद्दे को दरकिनार कर मोदी और योगी के चेहरे पर भरोसा जताया है। 

बसपा ने बिगाड़ा समीकरण

आजमगढ़ उपचुनाव का परिणाम आने के बाद यूपी की सियासत में हलचल मची हुई है। हलचल मचे भी क्यों न, क्योंकि आजमगढ़ को सपा का गढ़ माना जाता है। अखिलेश यादव यहां से खुद सांसद रह चुके है। हाल ही में यूपी विधान सभा चुनाव में मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अखिलेश विधानसभा पहुंचे हैं। जिसकी वजह से उन्हें आजमगढ़ सीट को छोड़नी पड़ी थी। अखिलेश ने अपने चचेरे भाई धर्मेंद यादव को लोकसभा उपचुनाव में उतारा था, लेकिन उनकी ये रणनीति कामयाब नहीं हो सकी और वह बुरी तरह से हार गए।

अखिलेश के ऊपर बीजेपी आरोप लगाती रही है कि आजमगढ़ से सांसद रहने के दौरान वहां की जनता से दूर रहे। जबकि बीजेपी प्रत्याशी रहे निरहुआ आजमगढ़ की हर समस्या को उठाते रहे और क्षेत्र में निरंतर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे। जिसका परिणाम आज सामने देखा जा सकता है।

दूसरी सबसे अहम बात यह रही कि बसपा ने स्थानीय नेता गुड्डू जमाली को मैदान में उतार कर सपा का सारा समीकरण खराब कर दिया। सपा को मुस्लिम, यादव व पिछड़ी जातियों के वोटरों पर आंख मूंदकर भरोसा था कि उनकी ही झोली में जाएगा, हालांकि ऐसा नहीं हुआ और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव की सीट हाथ से निकल गई। 

जीत के बाद निरहुआ ने सपा पर बोला हमला

बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने जीत के बाद अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विरासत में मिली सियासत के अहंकार का अंत हो गया है। यह जनता की जीत है। निरहुआ ने ट्वीट किया कि आजमगढ़वासियों आपने कमाल कर दिया है, यह आपकी जीत है। उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही जिस तरीके से आप सबने भाजपा को प्यार, समर्थन और आशीर्वाद दिया, यह उसकी जीत है। यह जीत आपके भरोसे और देवतुल्य कार्यकर्ताओं की मेहनत को समर्पित है।