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झाबुआ उप-चुनाव में हार से भाजपा में बढ़ी रार

झाबुआ उप-चुनाव में हार से भाजपा में बढ़ी रार

हाईलाइट

  • झाबुआ उप-चुनाव में हार से भाजपा में बढ़ी रार

डिजिटल डेस्क,भोपाल। मध्य प्रदेश के झाबुआ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में मिली हार ने भाजपा के भीतर चल रहे असंतोष को सामने लाने का काम कर दिया है। विधायक केदारनाथ शुक्ला ने तो सीधे तौर पर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह पर ही हमला बोल दिया है। पार्टी के भीतर यह आग और न भड़के इसके लिए शुक्ला को आनन-फानन में कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया गया है।

राज्य में कांग्रेस बाहरी समर्थन से सरकार चला रही है, ऐसी स्थिति में भाजपा झाबुआ उप चुनाव जीत कर सरकार की मुश्किल बढ़ाना चाहती थी। इसके लिए उसने रणनीति भी बना ली थी कि झाबुआ उप-चुनाव में जीत दर्ज करते असंतुष्ट और बागी तेवर रखने वाले विधायकों पर डोर डाले जाएं जिससे कमलनाथ सरकार मुश्किल में आए, मगर हार मिलते ही पार्टी के भीतर विरोधी स्वर उठने लगे हैं।

सीधी जिले से विधायक केदार नाथ शुक्ला ने सीधे तौर पर पार्टी के प्रदेश इकाई अध्यक्ष राकेश सिंह पर हमला बोलते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता पर ही सवाल उठा दिए है।

उनका कहना है, झाबुआ में न तो भाजपा की हार हुई है और न ही कांग्रेस की जीत। चुनाव में प्रतिकूल परिणाम सिर्फ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह के अराजनीतिक कृत्यों के कारण आया है। केंद्रीय नेतृत्व को जल्दी से जल्दी उन्हें पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद से हटा देना चाहिए।

विधायक शुक्ला के प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ आए बयान के बाद कोई और बयान सामने न आए, हार के लिए किसी दूसरे को जिम्मेदार न ठहराया जाए, इस पर अंकुश लगाने के मकसद से पार्टी ने आनन-फानन में गुरुवार की रात को ही शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

भाजपा की प्रदेश इकाई के महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा का कहना है कि झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को लेकर सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला के वक्तव्य को पार्टी अनुशासनहीनता मानती है। उन्होंने जो कहा है वह पार्टी की रीति-नीति के तहत नहीं आता। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर अक्षमता के जो आरोप लगाए हैं, उसके संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के उपरांत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब आने पर पार्टी आगामी कार्यवाही करेगी ।

शर्मा ने लोकसभा चुनाव में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा, पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के नेतृत्व में ही 29 में से 28 सीटें जीती हैं। भाजपा उपचुनाव पहली बार नहीं हारी है, इससे पहले हम सत्ता में रहते हुए भी उप चुनाव हारे हैं। पार्टी की जीत और हार में सामूहिक नेतृत्व होता है।

राज्य की कमलनाथ सरकार को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं है और राज्य की 230 सदस्यीय विधानसभा में झाबुआ उप चुनाव से पहले कांग्रेस के पास बहुमत से दो कम 114 विधायक थे, जो अब बढ़कर 115 हो गए है, इस तरह कांग्रेस पूर्ण बहुमत के आंकड़े के करीब बढ़ी है और उसके पास अब सिर्फ एक सीट कम है। वहीं भाजपा के 108 विधायक थे जो विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से एक कम हो गए है। कांग्रेस को बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है। इस तरह सरकार को अब 122 विधायकों का समर्थन हो जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया भाजपा में अंतर्कलह की बात स्वीकारते हैं और कहते है कि बीते 10 माह में भाजपा का प्रदर्शन निचले स्तर पर है। उसमें नीति, नेता और नेतृत्व कहीं भी नजर नहीं आता है। पार्टी के बड़े नेताओं में टकराव का दौर जारी है, जहां तक केदार नाथ शुक्ला की बात है तो वह तो सिर्फ राकेश सिंह के विरोधी खेमे के मोहरा मात्र हैं।

सूत्रों का कहना है कि, भाजपा झाबुआ चुनाव के बाद सरकार को बड़ा झटका देना चाहती थी, यही कारण है कि, चुनाव के दौरान यहां तक बयान आ गए थे कि दीपावली के बाद राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। अब स्थिति विपरीत हो गई है, लिहाजा पार्टी के भीतर असंतोष का फूटना लाजिमी था और वैसा ही हुआ, मगर अब आगे यह सिलसिला न बढ़े इसी के चलते महज कुछ घंटों में ही कारण बताओ नेाटिस जारी कर दिया गया, यह ठीक वैसा ही है कि, आग के बड़ा रुप लेने से पहले ही पानी डाल दिया जाए।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।