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राज्यसभा चुनाव : सीएम येदियुरप्पा पर कैसे भारी पड़े भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष?

June 11th, 2020 02:48 IST
राज्यसभा चुनाव : सीएम येदियुरप्पा पर कैसे भारी पड़े भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष?

हाईलाइट

  • राज्यसभा चुनाव : सीएम येदियुरप्पा पर कैसे भारी पड़े भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष?

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय से 8 जून को जब कर्नाटक के दो राज्यसभा सीटों के उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तो उसमें अपना नाम देखकर खुद इरन्ना कडाडी और अशोक गस्ती चौंक पड़े। वजह कि इन दोनों जमीनी नेताओं का नाम उस सूची में था ही नहीं, जो मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और भाजपा की प्रदेश इकाई ने पार्टी मुख्यालय को भेजी थी। बीएस येदियुरप्पा ने मौजूदा राज्यसभा सदस्य प्रभाकर कोरे, पूर्व सांसद रमेश कत्ती और कारोबारी प्रकाश शेट्टी का नाम प्रस्तावित किया था। लेकिन पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने तीनों नाम खारिज करते हुए संघ पृष्ठिभूमि के दोनों जमीनी नेताओं के नाम पर मुहर लगा दी।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि कभी आरएसएस प्रचारक का दायित्व निभाने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बने बीएल संतोष के सुझाव पर ही पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की पसंद के नामों की जगह अशोक गस्ती और इरन्ना कडाडी को टिकट देना ज्यादा उचित समझा। बीएल संतोष के तर्कों से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह के सहमत होने के बाद अशोक गस्ती और इरन्ना कडाडी को टिकट मिल सका।

राज्यसभा के टिकट वितरण में बीएस येदियुरप्पा की पसंद दरकिनार किए जाने के बाद बीजेपी के अंदरखाने कई तरह की चचार्एं छिड़ गईं हैं। कहा जा रहा है कि कर्नाटक के मामले में पार्टी नेतृत्व येदियुरप्पा की जगह बीएल संतोष पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। वजह कि येदियुरप्पा 77 साल के हो चुके हैं और अब पार्टी उनमें ज्यादा संभावनाएं देखने की जगह सेकंड लाइन को आगे बढ़ाने में जुटी है। कर्नाटक से नाता रखने के कारण राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए आंख-कान बने हैं। बीएल संतोष की छवि शीर्ष नेतृत्व की नजर में ऐसे नेता की है, जो कारोबारी और जुगाड़ू नेताओं की जगह जमीनी नेताओं का नाम आगे बढ़ाने में यकीन रखते हैं।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी सूर्या को टिकट देने के मसले के बाद यह दूसरा मौका है, जब बीएल संतोष, येदियुरप्पा पर प्रभावी साबित हुए हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, यह सही है कि कर्नाटक में काम करने के दौरान ही बीएल संतोष और बीएस येदियुरप्पा के बीच रिश्ते सामान्य नहीं रहे हैं। लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम को लेकर उनके बीच कोई प्रतिद्वंदिता नहीं रही। बीएस येदियुरप्पा ने जो नाम प्रस्तावित किया, उससे कहीं उपयुक्त नाम राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने सुझाए तो पार्टी नेतृत्व ने उस पर मुहर लगा दी। ऐसे में इसमें कोई थ्योरी नहीं ढूंढनी चाहिए।

कर्नाटक से राज्यसभा टिकट पाने वाले दोनों नेता हम उम्र हैं और उन्होंने करीब एक ही समय से राजनीति शुरू की। 55 साल के एरन्ना कडाडी कर्नाटक के बेलगावी से हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी 1989 से शुरू की। एबीवीपी और संघ में काम करते हुए वह भाजपा में पहुंचे। गोकाक और बेलागवी ग्रामीण यूनिट के अध्यक्ष भी रहे। 1994 में पार्टी ने उन्हें आरंभवी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था मगर हार गए थे। दूसरे उम्मीदवार अशोक गस्ती भी 55 वर्ष के हैं। कर्नाटक के रायचूर के निवासी अशोक गस्ती ने भी करियर एबीवीपी से शुरू किया। फिर वह भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में आए। कर्नाटक में भाजपा के बैकवर्ड क्लास कमेटी की जिम्मेदारी देख चुके हैं। दोनों नेताओं की संघ पृष्ठिभूमि उनकी दावेदारी मजबूत करने में मददगार साबित हुई।

क्यों येदियुरप्पा के नाम हुए दरिकनार ?

पार्टी सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि शीर्ष नेतृत्व ने इस बार ऐसे नेताओं को राज्यसभा का टिकट देने की तैयारी की, जो पार्टी के लिए लंबे समय से समर्पित भाव से काम करने वाले हों मगर उन्हें कभी बड़े पद पर न जाने का मौका मिला हो। चूंकि येदियुरप्पा की सूची में शामिल प्रभाकर कोरे को जहां पार्टी राज्यसभा जाने का मौका दे चुकी थी, वहीं रमेश कत्ती के बारे में पार्टी नेतृत्व को कई शिकायतें मिलतीं रहीं। उनके बागी रुख अख्तियार करने का मामला भी ऊपर तक पहुंच चुका था। उनकी महत्वकांक्षा को पार्टी नेतृत्व पसंद नहीं कर रहा था। पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में रमेश कत्ती चिकोडी सीट से टिकट चाहते थे मगर पार्टी ने अन्नासाहेब को चुनाव मैदान में उतारा था। फिर वह लाख कोशिशों के बावजूद येदियुरप्पा की कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए और अब राज्यसभा जाने की कोशिश में लगे थे लेकिन फिर पार्टी ने नजरअंदाज कर दिया। रमेश कत्ती के एक भाई विधायक हैं। ऐसे में पार्टी ने एक ही परिवार से दो-दो लोगों को बड़े मौके देने की जगह किसी और चेहरे पर दांव खेलने ज्यादा उचित समझा।

सूत्रों का कहना है कि बीएल संतोष ने पार्टी नेतृत्व को बताया कि जमीनी नेताओं को मौका दिए जाने से पार्टी के काडर में सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्हें लगेगा कि उनकी समर्पित सेवाओं को पार्टी याद रखती है। एक व्यक्ति या एक ही परिवार को अधिक मौके देने की जगह ऐसे लोगों को मौके दिए जाएं, जिन्हें पार्टी के लिए अधिक मेहनत के बाद भी आगे बढ़ने के ज्यादा मौके न मिले हों। बीएल संतोष ने सोशल इंजीनियरिंग भी साधने की कोशिश की है। अशोक गस्ती जहां पिछड़ा समुदाय से आते हैं, वहीं इरन्ना कडडी लिंगायत समुदाय के हैं।

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Paytm Money: अब पेटीएम मनी ऐप से हर कोई कर सकता है स्टॉक मार्किट में  निवेश, कंपनी का 10 लाख निवेशकों को जोड़ने का लक्ष्य

Paytm Money: अब पेटीएम मनी ऐप से हर कोई कर सकता है स्टॉक मार्किट में  निवेश, कंपनी का 10 लाख निवेशकों को जोड़ने का लक्ष्य

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। भारत के घरेलु वित्तीय सेवा प्रदाता पेटीएम ने आज घोषणा की है कि इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी पेटीएम मनी ने देश में सभी के लिए स्टॉकब्रोकिंग की सुविधा शुरू कर दी है। कंपनी का लक्ष्य इस वित्त वर्ष में 10 लाख से अधिक निवेशकों को जोड़ना है, जिसमें अधिकतर छोटे शहरों और कस्बों से आने वाले फर्स्ट टाइम यूजर्स होंगे। इस प्रयास का उद्देश्य उत्पाद के आसान उपयोग, कम मूल्य निर्धारण (डिलीवरी ऑर्डर पर जीरो ब्रोकरेज, इंट्राडे के लिए 10 रुपये) और डिजिटल केवाईसी के साथ पेपरलेस खाता खोलने के साथ निवेश को प्रोत्साहित करना तथा अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुंचना है। कंपनी भारत में सबसे व्यापक ऑनलाइन वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफार्म बनने के लिए प्रयासरत है, जो वित्तीय समावेशन के लक्ष्य के तहत आम लोगों तक आसानी से पहुंच सके।

पेटीएम मनी को अपने शुरुआती प्रयास में ही लोगों से भारी प्रतिक्रिया मिली और उसने 2.2 लाख से अधिक निवेशकों को अपने साथ जोड़ लिया। इनमें से, 65% उपयोगकर्ता 18 से 30 वर्ष के आयु वर्ग में हैं, जो दर्शाता है कि नई पीढ़ी अपनी वेल्थ पोर्टफोलियो का निर्माण कर रही है। टियर-1 शहरों जैसे मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, जयपुर और अहमदाबाद में इस प्लेटफार्म को बड़े स्तर पर अपनाया गया है। ठाणे, गुंटूर, बर्धमान, कृष्णा, और आगरा जैसे छोटे शहरों में भी लोगों का भारी झुकाव देखने को मिला है। यह सेवा सुपर-फास्ट लोडिंग स्टॉक चार्ट्स, ट्रैक मार्केट मूवर्स एंड कंपनी फंडामेंटल्स सुविधाओं के साथ अब आईओएस, एंड्रॉइड और वेब पर उपलब्ध है। पेटीएम मनी ऐप शेयरों पर निवेश, व्यापार और सर्च के लिए प्राइस अलर्ट और एसआईपी सेट करने के लिए आसान इंटरफ़ेस प्रदान करता है।

इस अवसर पर पेटीएम मनी के सीईओ, वरुण श्रीधर ने कहा, "हमारा उद्देश्य वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं को आबादी के बड़े हिस्से तक पहुंचाना है, जो आत्मानिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान करेगी। हमारा मानना है कि यह मिलेनियल और नए निवेशकों को उनके वेल्थ पोर्टफोलियो के निर्माण में सक्षम बनाने का समय है। प्रौद्योगिकी पर आधारित हमारे समाधान शेयर में निवेश को सरल और आसान बनाता है। हम वर्तमान उत्पादों को चुनौती देते रहेंगे और भारत के सर्वश्रेष्ठ उत्पाद का निर्माण करते रहेंगे। हम पेटीएम मनी को सभी भारतीय के लिए एक व्यापक वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफार्म बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। "

इतने कम समय में पेटीएम मनी पर स्टॉक ट्रेडिंग को व्यापक रूप से अपनाया जाना काफी महत्व रखता है। यह हर भारतीय के लिए डिजिटल निवेश को आसान बनाने के कंपनी के प्रयासों की सराहना को भी दर्शाता है। शेयरों में आसान निवेश के साथ, प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता को बाजार के बारे में शोध करने, मार्केट मूवर्स का पता लगाने, अनुकूल वॉचलिस्ट तैयार करने और 50 से अधिक शेयरों के लिए प्राइस अलर्ट सेट करने के अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, उपयोगकर्ता स्टॉक के लिए साप्ताहिक / मासिक एसआईपी सेट कर सकते हैं, और स्टॉक में निवेश को आॅटोमेट कर सकते हैं। बिल्ट-इन ब्रोकरेज कैलकुलेटर के साथ, निवेशक लेनदेन शुल्क का पता लगा सकते हैं और शेयरों को लाभ पर बेचने के लिए ब्रेक-इवेन प्राइस जान सकते हैं। इसके अलावा, स्टॉक ट्रेडिंग के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड चार्ट और अन्य विकल्प जैसे कवर चार्ट तथा ब्रैकेट ऑर्डर भी जोड़े गए हैं। इन सुविधाओं के अलावा बैंक-स्तरीय सुरक्षा के साथ निवेशकों के व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखते हुए अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।


पेटीएम मनी के बारे में
पेटीएम मनी वन97 कम्युनिकेशंस की पूर्ण स्वामित्व वाली एक सहायक कंपनी है। वन97 कम्युनिकेशंस भारत की घरेलू वित्तीय सेवा प्रदाता पेटीएम का स्वामित्व भी रखता है। यह देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन इंवेस्टमेंट प्लेटफार्म है, और अब इसने उपयोगकर्ताओं के लिए डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स और एनपीएस के अपने वर्तमान आॅफर में स्टॉक्स को भी जोड़ दिया है। पेटीएम मनी का लक्ष्य एक पूर्ण-स्टैक इंवेस्टमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफार्म बनना और लाखों भारतीयों तक धन सृजन के अवसरों को पहुंचाना है। बेंगलुरु स्थित मुख्यालय से संचालित इस कंपनी की टीम में 300 से अधिक सदस्य हैं।