जम्मू -कश्मीर : परिसीमन आयोग ने अपने कुछ मसौदा प्रस्तावों को फिर से तैयार किया

February 26th, 2022

डिजिटलड डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मामले में परिसीमन आयोग ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नेशनल कांफ्रेंस सहित सहयोगी सदस्यों द्वारा प्रस्तुत कुछ सुझावों को स्वीकार कर लिया है और अन्य को खारिज करते हुए अपने कुछ मसौदा प्रस्तावों को फिर से तैयार किया है। सहयोगी सदस्यों को 4 मार्च तक अपना जवाब देने को कहा गया है, जिसके बाद अंतिम मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा।

सरकार ने परिसीमन आयोग का कार्यकाल दो महीने बढ़ा दिया है और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू -कश्मीर में 90 विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए इसके पास 6 मई तक का समय है। वह पहले ही कश्मीर संभाग को 47 और जम्मू क्षेत्र को 43 सीटें दे चुका है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा और राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) के.के. शर्मा शामिल हैं । इसे 6 मार्च, 2020 को गठित किया गया था।

आयोग ने फिर से तैयार किए गए मसौदा प्रस्तावों के बाद, पुंछ विधानसभा क्षेत्र को खोल दिया है और इसके बजाय अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए राजौरी को आरक्षित कर दिया है। आयोग ने आरएस पुरा के कुछ हिस्सों को जम्मू दक्षिण सीट के साथ विलय कर दिया है ताकि इसका नाम बदलकर आरएस पुरा-जेएस (जम्मू दक्षिण)किया जा सके तथा सुचेतगढ़ और हब्बाकदल विधानसभा क्षेत्र का पहले वाला दर्ज बरकरार कर दिया है। सुचेतगढ़ को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किया गया है।

आयोग ने पुंछ, मेंढर, सुरनकोट, थन्ना मंडी, राजौरी, बनिहाल, मढ़, जम्मू उत्तर आदि सहित कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तैयार किया है और किश्तवाड़ की मुगल मैदान सीट का नाम इंदरवाल के तौर पर बदल दिया है। आयोग के सूत्रों ने बताया कि अनंतनाग-पुंछ संसदीय क्षेत्र में शोपियां को शामिल करने के भाजपा के सुझाव को खारिज कर दिया गया है। इसने पुंछ जिले और राजौरी जिले के कुछ हिस्सों को दक्षिण कश्मीर संसदीय क्षेत्र में शामिल करने के लिए नेकां की आपत्ति को भी खारिज कर दिया है।

आयोग ने पुंछ जिले में कम से कम एक विधानसभा सीट का आरक्षण रद्द करने के भाजपा के सुझाव को स्वीकार कर लिया क्योंकि वहां के सभी तीन निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित थे। पुंछ-मंडी निर्वाचन क्षेत्र को अनारक्षित कर सामान्य सीट घोषित कर दिया गया है। पुंछ के स्थान पर राजौरी मुख्य विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किया गया है। अब, जम्मू क्षेत्र में एसटी के लिए आरक्षित पांच सीटें पुंछ जिले में सुरनकोट और मेंढर और राजौरी जिले में राजौरी, दरहल और थन्ना मंडी में हैं। कश्मीर संभाग में एसटी के लिए चार सीटें आरक्षित हैं और कुल मिलाकर ऐसी सीटों की संख्या नौ हो गई हैं।

आयोग ने जम्मू जिले में सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र को बहाल कर दिया है, जिसे 4 फरवरी को पांच एसोसिएट सदस्यों को सौंपी गई मसौदा रिपोर्ट में आरएस पुरा और बिश्ना में विलय कर दिया गया था। सुचेतगढ़ सीट को आरएस पुरा के स्थान पर बहाल कर अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित कर दिया गया है। आरएस पुरा के कुछ हिस्सों को जम्मू दक्षिण विधानसभा सीट (पहले गांधी नगर या छावनी के रूप में जाना जाता था) के साथ मिला दिया गया है और अब इसका नाम बदलकर आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण (आरएस पुरा-जेएस) कर दिया गया है।

इससे पहले आरएस पुरा एससी के लिए आरक्षित था। आरएस पुरा-जेएस अब मुक्त सीट है और सुचेतगढ़ सातवां निर्वाचन क्षेत्र है जो एससी के लिए आरक्षित है। छह अन्य सीटें मढ़, अखनूर, बिश्नाह, सांबा, कठुआ दक्षिण और रामनगर हैं। पैनल ने सुचेतगढ़ और आरएस पुरा-जेएस की सीमाओं का पुन: समायोजन किया है।

समझा जाता है कि परिसीमन आयोग ने श्रीनगर जिले में हब्बाकदल विधानसभा क्षेत्र को बहाल करने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा दोनों के सुझाव को स्वीकार कर लिया है। यहां कश्मीरी पंडितों की अधिक आबादी है और किश्तवाड़ जिले में मुगल मैदान सीट का नाम बदलकर इंदरवाल कर दिया गया है।

इस निर्वाचन क्षेत्र को पहले इंदरवाल के नाम से भी जाना जाता था और मसौदा रिपोर्ट में इसे मुगल मैदान के रूप में नामित किया गया था। रायपुर दोमाना के कोट पटवार सर्कल जिनकी चार पंचायतों को मसौदा रिपोर्ट में मढ़ (एससी रिजर्व) सीट के साथ जोड़ा गया था, का अब जम्मू उत्तर विधानसभा क्षेत्र में विलय कर दिया गया है। डूंगी, सुहाना, बागला और फतेहपुर पंचायतें जो राजौरी जिले में नव निर्मित थन्ना मंडी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थीं, उन्हें राजौरी विधानसभा सीट के साथ जोड़ा गया है क्योंकि वे पहले राजौरी तहसील का हिस्सा थीं।

मण्डी प्रखंड के पुंछ पटवार हलकों को, जिन्हें मसौदा रिपोर्ट में सुरनकोट निर्वाचन क्षेत्र में शामिल किया गया था, फिर से पुंछ-मंडी खंड का हिस्सा बनाए गए हैं। इसी तरह, मेंढर खंड के कुछ हलके जो सुरनकोट में शामिल किए गए थे, उन्हें मेंधर में बदल दिया गया है। संगलदान क्षेत्र को अब रामबन जिले की बनिहाल विधानसभा सीट में शामिल किया गया है, जबकि बनिहाल के तंगर क्षेत्र को रामबन सीट में शामिल किया गया है। आयोग के इन पांच सहयोगी सदस्यों से मिलने और उन्हें उनके सुझावों व आपत्तियों के बारे में जानकारी देने की संभावना है जिन्हें स्वीकार या अस्वीकार कर दिया गया है। आयोग बैठक के बाद दावों और आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में रखेगा।

(आईएएनएस)