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Manipur politics: मणिपुर में भाजपा को झटका, 9 विधायकों ने समर्थन वापस लिया, खतरे में बीरेन सरकार

Manipur politics: मणिपुर में भाजपा को झटका, 9 विधायकों ने समर्थन वापस लिया, खतरे में बीरेन सरकार

डिजिटल डेस्क,इंफाल। मणिपुर में तीन साल पुरानी बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार संकट में आ गई है। उसके तीन विधायक इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। वहीं छह अन्य ने समर्थन वापस ले लिया। अब मणिपुर में कांग्रेस विश्वास मत के लिए विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग के साथ राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मिलेगी। हालांकि राज्य के उद्योग मंत्री बिस्वजीत सिंह ने दावा किया कि सरकार के लिए कोई खतरा नहीं है।

भाजपा के इन विधायकों ने दिया इस्तीफा
बीरेन सिंह की सरकार से जिन विधायकों ने समर्थन वापस लिया उनमें नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार, तृणमूल कांग्रेस के एक और एक निर्दलीय है। वहीं इस्तीफा देने वाले भाजपा विधायकों में सुभाषचंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेंदाई है। इस विधायकों के इस्तीफे से बीरेन सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई है। 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में वर्तमान में 52 विधायक हैं। सरकार बनाने के लिए 27 विधायकों की समर्थन की जरुरत है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास 30 विधायकों का समर्थन है। 20 उसके और 10 अन्य।

चुनाव में कांग्रेस बनी थी सबसे बड़ी पार्टी
2017 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस 28 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और भाजपा 21 के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार, नागा पीपुल्स फ्रंट के चार, तृणमूल कांग्रेस के एक, सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) का एक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से सरकार बनाई थी। जबकि आठ कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी। कांग्रेस के एक विधायक, श्यामकुमार सिंह अयोग्य घोषित किए गए थे क्योंकि राज्य चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था।

भाजपा के पास इन विधायकों का समर्थन
भाजपा के पास अपने 18 विधायकों के अलावा एनपीएफ और लोजपा के पांच विधायकों का समर्थन है। चुनाव के बाद पार्टी छोड़ने वाले आठ कांग्रेस विधायकों में से सात का भी समर्थन बीजेपी को हासिल है। ये विधायक अभी भी पार्टी के सदस्य हैं, लेकिन  इन विधायकों की अयोग्यता का मामला कोर्ट में लंबित है। फैसला सुनाए जाने तक वे मतदान नहीं कर सकते। मणिपुर हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह ही उन्हें विधानसभा में प्रवेश करने से रोक दिया था।

सरकार और राज्यसभा सीट बचाने जूझ रही भाजपा
गठबंधन और दलबदल के माध्यम से 30 निर्वाचित विधायकों के समर्थन के बावजूद, भाजपा मणिपुर में अपनी सरकार और राज्यसभा सीट को बचाने के लिए जूझ रही है। के भाबनंदा के अप्रैल में इस्तीफे से ये राज्यसभा सीट खाली हुई है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 19 जून यानि कल होगा। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के टी मंगी बाबू के खिलाफ भाजपा ने मणिपुर के टाइटालियर राजा लिसेम्बा संजाओबा को मैदान में उतारा हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।