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पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए अचूक रणनीति बनाने में जुटे दो बड़े नेता

June 15th, 2020 20:30 IST
 पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए अचूक रणनीति बनाने में जुटे दो बड़े नेता

हाईलाइट

  • पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए अचूक रणनीति बनाने में जुटे दो बड़े नेता

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का किला भेदने के लिए भाजपा के दो वरिष्ठ नेता, इन दिनों अचूक रणनीति बनाने की कोशिशों में जुटे हैं।

लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा वीडियो काफ्रेंसिंग मीटिंग करने वाले भाजपा नेताओं में इनका नाम है। हम बात कर रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश की। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी का मुकाबला करने के लिए दोनों नेता पूरी व्यूह रचना बनाने में जुटे हैं। बूथ लेवल पर टीम खड़ी करने से लेकर ममता बनर्जी सरकार को घेरने के लिए मुद्दों की तलाश भी यही नेता तय कर रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय और शिव प्रकाश जो लाइन तय करते हैं, पश्चिम बंगाल की प्रदेश इकाई उस पर चल पड़ती है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, जिस तरह से 2019 के लोकसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय ने फ्रंट पर तो शिव प्रकाश ने परदे के पीछे रहकर काम करते हुए भाजपा को पश्चिम बंगाल में 18 सीटें जिताने में मदद की, उससे पार्टी को भरोसा है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी चौंकाने वाले होंगे। विजयवर्गीय जहां बंगाल के कार्यकतार्ओं में सत्ताधारी टीएमसी के खिलाफ लड़ने का माद्दा पैदा करते हैं तो शिव प्रकाश संगठन की संरचना को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं।

बीते नौ जून को गृहमंत्री अमित शाह की पश्चिम बंगाल जनसंवाद रैली को सफल बनाने के लिए कैलाश विजयवर्गीय और शिव प्रकाश ने काफी मेहनत की। अधिक से अधिक लोगों को इस वर्चुअल रैली से जोड़ने की उन्होंने रणनीति बनाई। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश की मेहनत का नतीजा रहा कि 11 देशों में कुल 21 स्थानों पर बंगाल के निवासी लोगों ने अमित शाह का भाषण सुना।

राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश की बात करें तो वह संघ के प्रचारक रहे हैं। पश्चिम बंगाल के साथ उत्तराखंड में भी भाजपा के संगठन की निगरानी करते हैं। हालांकि, अगले साल विधानसभा चुनाव होने के कारण उनके एजेंडे पर फिलहाल पश्चिम बंगाल है। भाजपा में आने से पहले आरएसएस के प्रांत प्रचारक के तौर पर लंबे समय से काम कर चुके शिव प्रकाश को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक मसलों की गहरी समझ है। इससे पूर्व के दो लोकसभा चुनाव में शिव प्रकाश के अनुभव का भाजपा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लाभ भी उठा चुकी है।

गृहमंत्री अमित शाह उनकी कार्यशैली को पसंद करते हैं। सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शिव प्रकाश को भाजपा में भेजने के लिए संघ से अनुरोध किया था। तब, संघ की भोपाल में हुई बैठक के बाद संघ ने अपने प्रांत प्रचारक शिव प्रकाश को भाजपा में जाने की हरी झंडी दी थी। अमित शाह ने 2014 में उन्हें राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री की जिम्मेदारी दी थी। तब से वह इस भूमिका के साथ उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल में संगठन का काम देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश का भी फीडबैक वह शीर्ष नेतृत्व को देते रहते हैं।

उनके साथ काम कर चुके एक भाजपा नेता ने कहा, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाशजी छोटे-छोटे कार्यकतार्ओं के साथ भी संवाद पर जोर देकर पार्टी की जनता में पकड़ का फीडबैक लेने में यकीन रखते हैं। वह जिलाध्यक्षों से लेकर मंडल अध्यक्षों तक का हालचाल लेते रहते हैं। भाजपा में भी वह पुरानी प्रचारक शैली में काम करते हैं। अच्छे कार्यकतार्ओं की पहचानने की कला उनमें है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनाव में सफलता मिलने के बाद से पार्टी को लगने लगा है कि मिशन 2021 असंभव नहीं है। जिस तरह से तीन दशक से भी अधिक समय से सरकार चला रहे लेफ्ट को 2011 में ममता बनर्जी से पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर कर दिया था, उसी तरह से भाजपा को उम्मीद है कि वह 2021 में ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा देगी।

राज्य में तृणमूल कांग्रेस के बाद भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बन चुकी है। अब दोनों नेताओं का निशाना पार्टी को सत्ता दिलाना है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अगर 2021 में पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत हुई तो प्रभारी के तौर पर काम करने वाले राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश का पार्टी और राष्ट्रीय राजनीति में कद बढ़ना तय है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।