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उप्र : अब बसपा को कोर वोट बचाने की चुनौती

October 26th, 2019 09:00 IST
 उप्र : अब बसपा को कोर वोट बचाने की चुनौती

हाईलाइट

  • उप्र : अब बसपा को कोर वोट बचाने की चुनौती

लखनऊ, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) से गठबंधन तोड़कर अकेले उपचुनाव में उतरी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को बुरी पराजय मिली है। वह इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इसके अलावा 6 सीटों पर उसकी जमानत भी जब्त हो गई। ऐसे में आने वाले समय में बसपा को अपनी रणनीति बदलकर अपने कोर वोटरों को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।

उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और हरियाणा में बसपा का खाता नहीं खुला है। जहां पर मायावती स्वयं प्रचार करने भी गयीं थी।

बसपा मुखिया 2022 में सत्ता वापसी के सपने को उपचुनाव के नतीजों ने चकनाचूर कर दिया। इगलाश व जलालपुर सीट छोड़कर सबमें बसपा का प्रदर्शन खराब ही रहा है।

रामपुर, लखनऊ कैंट, जैदपुर, गोविंदनगर, गंगोह और प्रतापगढ़ ऐसी ही सीटें हैं, जहां बसपा अपनी जमानत नहीं बचा पाई। जमानत बचाने के लिए कुल पड़े वैध वोटों का 16.66 फीसदी चाहिए होता है लेकिन, बसपा को रामपुर में 2.14 फीसदी, लखनऊ कैंट में 9.64 फीसदी, जैदपुर में 8.21 फीसदी, गोविंद नगर में 4.52 फीसदी, गंगोह में 14़37 फीसदी और प्रतापगढ़ में 12.74 फीसदी वोट में सिमट गई। विधानसभा चुनाव में बसपा का मत सपा से पांच फीसदी कम रहा। सपा को जहां 22.57 प्रतिशत वोट मिले तो वहीं बसपा को महज 17 प्रतिशत में ही संतोष करना पड़ा।

दलित मुस्लिम के बने गठजोड़ पर समाजवादी पार्टी ने सेंधमारी की है। मुस्लिम बहुल रामपुर सीट पर बसपा महज 2 प्रतिशत वोटों में ही समिट गई है। सुरक्षित सीटों पर तो उसे मुंह की खानी पड़ी है। बलहा सुरक्षित सीट पर तीसरे स्थान पर रही, जबकि जैदपुर सुरक्षित सीट पर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई है।

लोकसभा चुनाव में 10 सीट जीतकर उप्र की राजनीति में पुन: मजबूत हुई बसपा को उपचुनाव किसी झटके से कम नहीं साबित हो रहे हैं। बसपा विपक्ष में नंबर दो की भूमिका आने के लिए जी जान से लगी हुई थी। ऐसे में बसपा का वोट प्रतिषत कम होना और एक भी सीट न मिलना उसे नए सिरे से अपनी रणनीति पर मंथन के लिए मजबूर करेगा।

बसपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि 2022 में सत्ता पाने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ बहन जी को भी जमीन पर उतरना होगा। जिस प्रकार से लोकसभा में मिली सफलता को महज 6 माह में धूमिल हो गई। उससे पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं है। सपा से तो हम पिछड़ गए। कुछ सीटों पर जिनका प्रदेश में वजूद नहीं है, वह कांग्रेस भी हमसे आगे रही। विधानसभा के आम चुनाव के मुकाबले में हमारा 5 प्रतिशत वोट कम होना बड़ी असफलता है। पार्टी के सामने मिशन 2022 जीतने के लिए अपने मुख्य 18 प्रतिशत वोटरों को साधने की बड़ी चुनौती है, जिससे निपटा जाएगा।

18 प्रतिशत पर दावा करने वाली बसपा का कुछ सीटों पर दहाई ना पार कर पाना यह संकेत करता है कि उसका कोर वोटर भी उसके पाले से छिटक कर या तो भाजपा में जा रहा है या फिर अपना भविष्य कांग्रेस और सपा में देख रहा है। ऐसे में मिशन 2022 में इन्हें संजोना बसपा के सामने बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रेमशंकर मिश्रा का कहना है कि बसपा प्रमुख को यह समझना होगा कि अब राजनीति में फरमान संस्कृति के लिए जगह नहीं बची है। अब चाहे मतदाता हो या समर्थक, वह अपने नेता से संवाद चाहता है। उसके मुद्दे व सवालों पर कितना खड़े हैं, इसका आकलन करता है। बसपा सपा के साथ का फायदा उठाकर लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम देने में सफल रही थी। लेकिन उसके बाद से जनता के सवालों पर केवल बयानबाजी तक ही समित रही है। अब ऐसे में वह जमीन उतरकर कैडर को खड़ा नहीं करेंगे। तो उनका कोर वोटर बचा पाना संभव नहीं होगा। उपचुनाव में कांग्रेस से पिछड़ा और आधा दर्जन सीटों पर जमानत जब्त होना, यह साबित करता ह हांथी के पांव के नीचे जमीन खिसक रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।