निशिकांत दुबे और सपा की बीच जुबानी जंग: सपा के लीगल नोटिस पर निशिकांत दुबे ने दी प्रतिक्रिया, अखिलेश यादव को लेकर भी किया जिक्र

सपा के लीगल नोटिस पर निशिकांत दुबे ने दी प्रतिक्रिया, अखिलेश यादव को लेकर भी किया जिक्र
बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी के चीफ के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। सपा ने दावा किया है कि समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके पाल की ओर से भेजे गए लीगल नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने खेद जताते हुए माफी मांगी है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी के चीफ के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। सपा ने दावा किया है कि समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके पाल की ओर से भेजे गए लीगल नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने खेद जताते हुए माफी मांगी है। हालांकि, जवाबी नोटिस में बीजेपी सांसद ने साफ किया है कि यह केवल सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यक्त किया गया खेद है, इसे किसी भी तरह से गलती या मानहानि स्वीकार करना नहीं माना जाए।

बीजेपी सांसद ने सपा चीफ से मांगी माफी

इस संबंध में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने दावा किया, "बहुत बड़े शूरवीर बने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बिना शर्त समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके पाल से माफी मांगी है। अब उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी माफी मांगनी चाहिए।"

सपा के दावों पर कटाक्ष करते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, "वकील पाल हैं या अखिलेश यादव जी? समाजवादी पार्टी को फिर मेरी सलाह है कि चाटुकारिता करने वालों को समझाइए। पहले तो मानहानि का नोटिस अखिलेश जी को देना था, लेकिन बदले में पाल ने नोटिस दे दिया। मैंने पूछा, 'पाल, आप कौन हैं?' तो पाल ने दूसरे वकील से नोटिस भिजवा दिया। अब नई कहानी बनाई जा रही है। मैंने अखिलेश यादव जी से कोई माफ़ी नहीं मांगी है। मैं गंगा किनारे का आदमी हूं, मर्दानगी और मर्यादा में लड़ता हूं। समाजवादी विचारधारा अफवाहों के लिए बनी है।"

अखिलेश यादव को लेकर कही ये बात

निशिकांत दुबे की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि उनका केके पाल की मानहानि करने का कोई इरादा नहीं था। नोटिस मिलने से पहले वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते भी नहीं थे।

उन्होंने जवाब में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी 7 जुलाई को भेजे गए एक अन्य लीगल नोटिस के संदर्भ में थी, किसी व्यक्ति या अधिवक्ता का अपमान करने के लिए नहीं।

जवाबी नोटिस में कहा गया है कि यदि उनकी किसी टिप्पणी से अनजाने में केके पाल को अपमानजनक महसूस हुआ हो या उनकी भावनाएं आहत हुई हों, तो वह इसके लिए हार्दिक खेद व्यक्त करते हैं और क्षमा प्रार्थी हैं। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि यह खेद केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए व्यक्त किया गया है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस खेद या क्षमायाचना को किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी, गलती या मानहानि स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही सांसद की ओर से नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए अपने सभी कानूनी अधिकार सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है।

Created On :   14 July 2026 12:33 AM IST

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