दैनिक भास्कर हिंदी: इंग्लैंड में जीत के लिए सौरभ गांगुली ने कोहली को दी यह खास सलाह

September 25th, 2018

हाईलाइट

  • गांगुली ने टीम इंडिया को जीतने का मूल मंत्र दिया है।
  • गांगुली ने भारतीय बल्लेबाजों को जिम्मेदारी के साथ खेलने की सलाह दी।
  • दूसरा मुकाबला लॉर्ड्स में खेला जाना है।

डिजिटल डेस्क, बर्मिंघम। भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला लॉर्ड्स में खेला जाना है। दूसरे टेस्ट से पहले भारत के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने टीम इंडिया को जीतने का मूल मंत्र दिया है। गांगुली ने रविवार को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर लिखा है कि कप्तान कोहली को हार के बाद टीम में बदलाव नहीं करना चाहिए। पहले मैच में भारतीय टीम को 31 रनों से हार का मुंह देखना पड़ा था। गांगुली ने कहा कि अगर कोहली क्रीज पर नहीं होते तो टीम इंडिया दो दिन में मैच गंवा बैठती।

गांगुली ने भारतीय बल्लेबाजों को जिम्मेदारी के साथ खेलने की सलाह भी दी। दादा ने कहा, 'अगर आपको टेस्ट मैच जीतना है तो सभी बल्लेबाजों को रन बनाने होंगे। टीम में वापसी करने और अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है। इसके लिए कप्तान कोहली को अपने खिलाड़ियों को पर्याप्त मौका देने की जरूरत है। लगातार प्लेइंग 11 में बदलाव करने से खिलाड़ी मेंटली परेशान हो जाते हैं। यह कोहली की टीम है और केवल वह ही खिलाड़ियों की मानसिकता को बदल सकते हैं। कोहली अपने खिलाड़ियों को एक साथ बैठाएं और कहें जब वे कर सकते हैं तो बाकी टीम क्यों नहीं कर सकती। उन्हें खिलाड़ियों को बिना किसी डर के खेलने के लिए पर्याप्त मौका देना चाहिए।'

सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और उप-कप्तान अंजिक्या रहाणे पर अपनी राय देते हुए गांगुली ने कहा कि इन दोनों बल्लेबाजों को और दृढ़ता से खेलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह दोनों बल्लेबाज भारतीय टीम की धूरी हैं और यह पहले भी इन परिस्थितियों में स्कोर कर चुके हैं। गांगुली ने कहा, 'बल्लेबाजों के खराब प्रदर्शन के लिए स्विंग अब कोई बहाना नहीं है। यह सभी जानते हैं कि इंग्लैंड में गेंद स्विंग होती है। इसलिए अगर आपने पहले इस कन्डिशन में स्कोर किया है तो अब क्यों नहीं।

दादा ने खिलाड़ियों को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट खेलने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा, 'जितनी भी दिग्गज टीम रही हैं, उनके सभी खिलाड़ी दोनों फॉर्मेट खेलते थे। चाहे वह ऑस्ट्रेलिया हो या साउथ अफ्रिका या हमारी टीम, जिसमें मेरे अलावा तेंदुलकर, द्रविड़, सेहवाग शामिल थे। इसलिए जब आप एक या दो मैचों में असफल रहते थे तो आपके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी का मौका रहता था।'

बता दें कि सौरव गांगुली 2002 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम के कप्तान थे। दोनों ही देशों के बीच खेली गई यह सीरीज बराबरी पर खत्म हुई थी। इसके बाद भारतीय टीम ने 2007 में राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में टेस्ट मैचों की सीरीज में जीत हासिल की थी। तब से भारतीय टीम इंग्लैंड में एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है।