comScore

सहवाग-गंभीर DDCA क्रिकेट कमेटी में, हितों के टकराव को लेकर उठे सवाल

July 26th, 2018 08:47 IST
सहवाग-गंभीर DDCA क्रिकेट कमेटी में, हितों के टकराव को लेकर उठे सवाल

हाईलाइट

  • DDCA ने सिलेक्टर चुनने वाली कमेटी में गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग को शामिल किया है।
  • तीन सदस्यीय कमेटी में वीरेन्द्र सहवाग के अलावा आकाश चोपड़ा और राहुल संघवी है।
  • गौतम गंभीर कमेटी में स्पेशल इन्वाइटी की भूमिका में नजर आएंगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) ने बुधवार को सिलेक्टर चुनने वाली कमेटी में भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाजों की जोड़ी गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग को शामिल किया है। तीन सदस्यीय कमेटी में वीरेन्द्र सहवाग के अलावा आकाश चोपड़ा और राहुल संघवी है। वहीं गौतम गंभीर कमेटी में स्पेशल इन्वाइटी की भूमिका में नजर आएंगे। डीडीसीए अध्यक्ष रजत शर्मा की ओर से यह जानकारी दी गई है।

हितों के टकराव को लेकर सवाल 
शर्मा गुट के सत्ता में आने के बाद यह तय था कि गंभीर को अहम भूमिका मिलेगी। सहवाग की एक क्रिकेट अकादमी है और वह इंडिया टीवी से भी जुड़े हैं। संघवी आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस से जुड़े हैं, जबकि आकाश विभिन्न चैनलों पर कमेंट्री करते हैं। दोनों मुंबई में रहते हैं। रजत शर्मा ने बताया कि इस कमेटी के पास कोच और चयनकर्ताओं को चुनने के अलावा खेल से जुड़े अन्य मामलों में फैसला लेने के अधिकार होंगे। उन्होंने कहा कि यह कमेटी जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों और बीसीसीआई के निर्देशानुसार काम करेगी। हालांकि कहानी इसके उलट नजर आ रही है।

योग्य क्रिकेटरों की बताई कमी
गौतम गंभीर ने अभी क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है। ऐसे में वे चयनकर्ताओं का चयन कैसे कर सकते हैं? वहीं, चयनकर्ता उन्हें चुनेंगे? डीडीसीए सचिव विनोद तिहाड़ा यह पूछने पर कि क्या उन्हें चयनकर्ताओं और कोचों के चयन में बोलने का अधिकार होगा, उन्होंने कहा,‘ निश्चित तौर पर। मैं हितों के टकराव पर आपका सवाल समझ सकता हूं, लेकिन अगर हम लोढ़ा समिति के सुझावों पर शब्दशः अमल करें तो क्रिकेट समिति में इतने योग्य लोग नहीं आ सकेंगे।

कमेंट करें
4uZb9
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।