- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- औचक निरीक्षण के विरोध में उतरा...
मध्य प्रदेश न्यूज: औचक निरीक्षण के विरोध में उतरा सिविल कांट्रेक्टर एसोसिएशन, धरना देकर 16 मांगे रखी

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश सिविल कॉट्रेक्टर एसोसिएशन ने भोपाल के लोक निर्माण विभाग के बाहर कई मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदेश के कई जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने 16 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रमुख अभियंता आरएल वर्मा को ज्ञापन दिया। एसोसिएशन ने औचक निरीक्षण और मशीनरी स्वामित्व अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की। वहीं विभाग ने कई मांगों को जायज बताया है। लेकिन कुछ मांगों को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया। एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष खरिया का कहना है कि मशीनरी स्वामित्व की अनिवार्यता को रखने से छोटे ठेकेदारों को नुकसान होता है। कई बार छोटे ठेकेदार निविदा में ही पार्टिसिपेट नहीं कर पाते। एसोसिएशन ने विभाग के चलाए जा रहे औचक निरीक्षण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि औचक निरीक्षण के दौरान छोटी कमियों पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है। स10 करोड़ से अधिक के कार्य में ज्वाइंट वेंचर की व्यवस्था की जानी चाहिए। डामर के रेट बढ़े हुए हैं। रिफायनरीज में डामर उपलब्ध नहीं है। दस्य रामेश्वर मोहे सभी प्रकार के निर्माण कार्य में प्राइस एस्केलेशन और एडजस्टमेंट होना चाहिए। संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी जाती तो वे भूख हड़ताल पर जा सकते हैं। इसके वे निविदा का बहिष्कार करेंगे और कोर्ट का रास्ता अपनाएंगे।
नहीं मिलते अधिकारी
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि बाहर से आने वाले काटेक्टर से अधिकारी नहीं मिलते हैं। घंटों तक इंतजार कराया जाता है। प्रमुख अभियंता और अधीक्षण यंत्री से ठेकेदारों की बैठक का नियम है। लेकिन यह बैठक सालों से आयोजित नहीं की गई है। जनरल सेक्रेटरी यूनिस खान ने कहा कि कई ठेकेदार अधिकारियों की तुलना में ज्यादा अच्छा मैनेजमेंट कर सकते हैं। अधिकारी समझते हैं कि सिविल सोसाइटी उनकी गुलाम है। एसोसिएशन ने थर्ड पार्टी को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि थर्ड पार्टी का कोई काम नहीं है। उसकी भी तनख्वाह का खर्चा ठेकेदार को उठाना पड़ता है। उपाध्यक्ष संतोष कटियार ने आरोप लगाया कि मप्र के कुछ ठेकेदारों को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब पेटी कॉन्ट्रैक्ट हो गए हैं। ज्यादातर ठेके बाहर की ही कंपनियों को दिए जा रहे।
औचक निरीक्षण पर सवाल
औचक निरीक्षण को लेकर ठेकेदारों ने सवाल खड़े किए। कहना है कि सरकार ने एक अच्छे उद्देश्य के लिए औचक निरीक्षण शुरू किया था लेकिन अब इसमें भ्रष्टाचार होने लगा है। ब्लैकलिस्ट करने के बजाय ठेकेदार को सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। औचक निरीक्षण का एक समय अंतराल होना चाहिए। कार्य में अनियमितता के जिम्मेदार ठेकेदार के साथ पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी हैं। अधिकारियों पर क्यों कार्रवाई नहीं की जाती। विभाग के अधिकारी भी निरीक्षण करते हैं फिर औचक निरीक्षण की जरूरत क्या है।
यह भी पढ़े -बेटियों की जमीन गिरवी रखकर लिया 2 करोड़ का लोन, भोपाल के बिल्डर दंपती पर EOW का शिकंजा
क्या है प्रमुख मांगे
एसोसिएशन का कहा कि उनकी 16 सूत्रीय मांगे हैं। निर्माण कार्यों में मशीनरी की स्वामित्व की अनिवार्यता खत्म हो। सभी प्रकार के निर्माण कार्यों में प्राइस एस्केलेरेशन लागू हो। रॉयल्टी का समायोजन साजपत्र में निर्धारित दरों पर हो। अनुबंध पूरा होने पर एसडी, पीएसडी, बीजी निर्धारित समय पर रिलीज करें। अनुबंध राशि से अधिक कार्य होने पर आईडी वृद्धि और अतिरिक्त भुगतान समय पर हो। स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की समीक्षा की जाए। निविदा खोलने, पुनः परीक्षण और पुनर्निविदा में टेंडर फीस समाप्त हो। खनिज सामग्री, उत्खनन और परिवहन की अनुमति प्रक्रिया सरल की जाए। गारंटी और डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड को व्यावहारिक किया जाए। खरीदी बिल की अनिवार्यता, 10 करोड़ से अधिक कार्य पर ज्वाइंट वेंचर, गवर्नमेंट कांट्रेक्टर कॉर्डिनेशन कमेटी का गठन, भोपाल में कार्यालय के साथ नान बीओक्यू आइटम के नाम पर राशि रोकना बंद करने की मांग रखी है।
इनका कहना है
मांगों को लेकर कमेटी बनाकर विचार किया जाएगा, जो जायज मांगे हैं उन्हें पूरा करने का प्रयास करेंगे। इनमें से कुछ मांगे शासन स्तर की हैं। एसोसिएशन की मांग ऊपर लेवल तक पहुंचाई जाएंगी। सभी नियम गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए बनाए गए हैं।
Created On :   15 Oct 2026 11:29 PM IST












