Bhopal News: बेटियों को दान दी जमीन बैंक में गिरवी रखकर लिया 2 करोड़ लोन, वसूली रोकने बेटियों से करवाए मुकदमे

बेटियों को दान दी जमीन बैंक में गिरवी रखकर लिया 2 करोड़ लोन, वसूली रोकने बेटियों से करवाए मुकदमे
ईओडब्ल्यू ने बुधवार को बिल्डर जीशान अली और पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। दरअसल, दंपत्ति ने पहले बेटियों को जमीन दान दे दी और फिर इसे षडयंत्रपूर्वक पंजाब नेशनल बैंक में 2 करोड़ में गिरवी रख दी। बाद में रिकवनी न हो इसलिए बेटियों से मुकदमा दर्ज करवा दिया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। ईओडब्ल्यू ने बुधवार को बिल्डर जीशान अली और पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। दरअसल, दंपत्ति ने पहले बेटियों को जमीन दान दे दी और फिर इसे षडयंत्रपूर्वक पंजाब नेशनल बैंक में 2 करोड़ में गिरवी रख दी। बाद में रिकवनी न हो इसलिए बेटियों से मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसमें बैंक को 2 करोड़ 7 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इसके चलते ईओडब्ल्यू ने आरोपी दंपत्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

ईओडब्ल्यू को जांच में पता चला है कि जो जमीन वर्ष 2013 में दंपत्ति ने अपनी बेटियों के नाम हिबा (दान) कर दी थी, उसे दो साल बाद स्वयं की बताकर बैंक में गिरवी रख कर ₹2 करोड़ का लोन ले लिया। इसे चुकाया भी नहीं और जब बैंक वसूली की कार्रवाई करने लगा बेटियों की ओर से अपने ही खिलाफ मुकदमे करवा दिए। यह साबित करने के लिए कि ज़मीन तो बेटियों की है और कानूनी दांवपेंच में फंसकर जमीन की कुर्की नहीं की जा सके और न ही वसूली हो सके। ईओडब्ल्यू ने शिकायत की जांच में यह मामला प्रथम दृष्टया षडयंत्र पूर्वक रची गई साजिश पाया। इसके आधार पर बुधवार को भोपाल के बिल्डर जीशान अली (एमडी मेसर्स रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कोलोनाईजर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रालि) और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया है।

इस प्रकरण में पीएनबी का ₹2 करोड़ 7 लाख 86,807 से ज्यादा का लोन बकाया है, जिसे लौटाया नहीं गया। आरोप है कि जीशान अली, नाजनीन अली और मां स्व. निकहत शमीम ने शुरू से ही धोखाधड़ी की नीयत से ग्राम बावड़िया कलां, तहसील हुजूर भोपाल में व्यावसायिक जमीन बैंक में गिरवी रखी। बेटियों के नाम पर पहले किया गया हिबानामा बैंक से छिपाया और ₹2 करोड़ का लोन लेकर चुकाया नहीं। बैंक की वसूली रोकने के लिए परिवार के लोगों से अपने ही खिलाफ सिविल मुकदमे दायर करवा दिए। ईओडब्ल्यू ने पंजाब नेशनल बैंक, उप-पंजीयक कार्यालय भोपाल, ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीटीआर ) जबलपुर और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) इलाहाबाद के रिकॉर्ड लेकर इसकी जांच की, जिसमें पाया गया कि यह ज़मीन शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की थी। समिति ने 2007 को टेंडर निकाला, जिसमें केवल जीशान अली ने बोली लगाई और2008 को रजिस्ट्री करवा ली।

बैंक का नोटिस मिलने से पहले ही सिविल वाद दायर करवाया

जीशान अली ने 2013 में यही ज़मीन हिबानामे से अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी थी, जिनमें से दो उस समय नाबालिग थीं। हिबानामा के आधार पर यह ज़मीन जीशान अली की नहीं, उनकी बेटियों की हो चुकी थी। आरोपी जीशान ने इसे बैंक के सामने स्वीकार भी किया। इसके बावजूद 2015 में बैंक में जमीन को जीशान अली की संपत्ति दिखाया कर 2015 की लीगल सर्च रिपोर्ट में ज़मीन को साफ़ और बिकने योग्य बताया गया। नाबालिग बेटियों के हित वाले कॉलम में नॉन लिखा गया। रिपोर्ट में हिबानामे का ज़िक्र नहीं किया। इसी आधार पर 2015 को रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के नाम ₹2 करोड़ का ओडी सीमा मंजूर हो गई। जांच में पाया गया कि उसी दिन हुए ओडी एग्रीमेंट और एग्रीमेंट ऑफ गारंटी में जीशान, नाजनीन और स्व. निकहत शमीम गारंटर बनें जमीन को गिरवी दर्शाया। 2017 में लोन खाता एनपीए हो गया। बैंक ने सरफेयसी कानून के तहत 2018 का डिमांड-नोटिस मिलने से पहले ही बेटियों की ओर से सिविल वाद दायर करवाया, जिसमें दावा किया गया कि ज़मीन के वे मालिक है और बैंक इसे नहीं ले सकता।

Created On :   15 Oct 2026 11:15 PM IST

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