सुरक्षा पर फिर सवाल: छत्रपति संभाजीनगर के एशियन हॉस्पिटल में लगी आग, 9 नवजातों की सांसों पर खतरा मंडराया, 58 मरीजों का रेस्क्यू

छत्रपति संभाजीनगर के एशियन हॉस्पिटल में लगी आग, 9 नवजातों की सांसों पर खतरा मंडराया, 58 मरीजों का रेस्क्यू
  • भोर के अंधेरे में एनआईसीयू से उठे धुएं ने मचाई अफरा-तफरी
  • एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट की आशंका, 5 फायर टेंडर और 30 एंबुलेंस ने संभाला मोर्चा
  • 10-15 मिनट में आग पर काबू, सभी 9 नवजातों को तीन अस्पतालों में कराया गया शिफ्ट

Chhatrapati Sambhaji Nagar News. अमरावती के जिला महिला अस्पताल की त्रासदी के करीब 10 दिन बाद संभाजीनगर में एनआईसीयू में आग ने अस्पतालों की फायर सेफ्टी पर सवाल फिर उठाए हैं। आकाशवाणी चौक के पास स्थित एशियन हॉस्पिटल में शुक्रवार तड़के करीब 2:45 बजे एनआईसीयू में अचानक धुआं उठने से हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में एसी यूनिट से आग की लपटें निकलने लगीं। उस समय एनआईसीयू में 9 नवजात शिशु उपचाराधीन थे। धुआं फैलते ही अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बिना देर किए सभी नवजातों को बाहर निकाला। समय रहते किए गए रेस्क्यू के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।


प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आग एनआईसीयू की एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण लगने की आशंका है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

ऐसा था अंदर का नजारा

  • वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारी।
  • एनआईसीयू की एसी यूनिट से धुआं उठने के बाद मची अफरा-तफरी।
  • एसी यूनिट से निकलता धुआं धीरे-धीरे आग की लपटों में बदला।
  • अस्पताल कर्मचारी एनआईसीयू से नवजातों को सुरक्षित बाहर निकालते हुए।
  • आग और धुएं के बीच अस्पताल परिसर में मरीजों और परिजनों के बीच मची अफरा-तफरी।
  • बचाव अभियान के दौरान अस्पताल में छाया धुएं का घना गुबार।
  • रेस्क्यू के बाद नवजातों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।


पहले दिखा धुआं, फिर उठने लगीं लपटें

तड़के एनआईसीयू में डॉक्टर और कर्मचारी अपनी ड्यूटी में व्यस्त थे। इसी दौरान एसी यूनिट से धुआं निकलता दिखाई दिया। देखते ही देखते धुआं बढ़ने लगा और एसी यूनिट से आग की लपटें निकलने लगीं। धुआं तेजी से फैलने के कारण एनआईसीयू समेत पहली मंजिल पर अफरा-तफरी मच गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल कर्मचारियों ने सबसे पहले एनआईसीयू में भर्ती नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में परिजनों की सहमति से सभी बच्चों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।

5 बच्चे घाटी, 3 एमजीएम और एक संजीवनी अस्पताल भेजा

रेस्क्यू किए गए 9 नवजातों में से 5 को घाटी अस्पताल, 3 को एमजीएम अस्पताल और 1 बच्चे को संजीवनी अस्पताल भेजा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी नवजात सुरक्षित हैं और उन्हें आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।

पहली मंजिल पर 58 मरीज, सभी को सुरक्षित निकाला

जिस पहली मंजिल पर एनआईसीयू स्थित है, वहां उस समय बड़ी संख्या में मरीज भर्ती थे। कुल 58 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें एनआईसीयू के 9 नवजातों के अलावा जनरल वार्ड के 36 और स्पेशल रूम के 13 मरीज शामिल थे।

5 फायर टेंडर और 30 एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं

आग की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। जवानों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 10 से 15 मिनट में आग पर काबू पा लिया। इससे आग को अस्पताल के अन्य हिस्सों तक फैलने से रोक लिया गया।

मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए करीब 30 एंबुलेंस भी मौके पर पहुंचीं। जवाहरनगर पुलिस और आरसीपी के जवानों ने राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग किया। धुएं का गुबार इतना घना था कि कुछ समय के लिए अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी स्पष्ट दृश्य दिखाई नहीं दे रहे थे।

अमरावती की त्रासदी के बाद फिर एनआईसीयू में आग

इस घटना ने महाराष्ट्र में अस्पतालों, खासकर एनआईसीयू और नवजात देखभाल केंद्रों की अग्नि-सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। करीब 10 दिन पहले अमरावती के जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू में भीषण आग लगी थी। उस हादसे में 3 नवजात बच्चों की मौत हुई थी, जबकि 36 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

अमरावती हादसे की शुरुआती जानकारी में वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग लगने की बात सामने आई थी। राज्य सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए थे।

अब संभाजीनगर के एशियन हॉस्पिटल के एनआईसीयू में आग की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि अस्पतालों में एसी, विद्युत उपकरण और फायर सेफ्टी सिस्टम की नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है।

फिलहाल एशियन हॉस्पिटल में आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सफाई का काम पूरा होने के बाद सामान्य कामकाज शुरू कर दिया गया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि इस बार समय रहते की गई कार्रवाई से 9 नवजातों समेत 58 मरीजों की जान बच गई।



Created On :   4 Sept 2026 8:44 PM IST

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