पहले से अधिक अधिकार: लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री भी होंगे, जांच के लिए दो-तिहाई विधायकों की मंजूरी जरूरी, सुनील शुक्रे ने ली अध्यक्ष पद की शपथ

लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री भी होंगे, जांच के लिए दो-तिहाई विधायकों की मंजूरी जरूरी, सुनील शुक्रे ने ली अध्यक्ष पद की शपथ
  • महाराष्ट्र में लोकायुक्त व्यवस्था को मिला पहले से अधिक अधिकार
  • राष्ट्रपति की आपत्तियों के बाद हुआ संशोधन
  • सुनील शुक्रे ने महाराष्ट्र लोकायुक्त अध्यक्ष पद की ली शपथ

Mumbai News. महाराष्ट्र में लोकायुक्त व्यवस्था को मजबूत करने और उसके अधिकारों में वृद्धि करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। नए महाराष्ट्र लोकायुक्त (संशोधन) कानून के तहत लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया है। अब मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर आईएएस अधिकारी और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी भी लोकायुक्त के दायरे में होंगे। हालांकि मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए विधानसभा के कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच प्रक्रिया गोपनीय रखने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है।

अन्ना हजारे समिति से शुरू हुई प्रक्रिया

राज्य में मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से चल रही थी। अन्ना हजारे समिति की सिफारिशों और केंद्र की लोकपाल व्यवस्था की तर्ज पर प्रभावी भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र लोकायुक्त विधेयक 28 दिसंबर 2022 को विधानसभा में पेश कर मंजूर किया गया। हालांकि इसके बाद विधेयक विधान परिषद में लंबित रहा। संशोधित प्रावधानों को विधान परिषद ने 15 दिसंबर 2023 को मंजूरी दी। इसी अधिवेशन में विधानसभा ने भी संशोधित विधेयक पारित कर दिया।

राष्ट्रपति की आपत्तियों के बाद हुआ संशोधन

दोनों सदनों से मंजूरी के बाद विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुछ बदलाव सुझाए। इसके बाद केंद्र के नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ अपडेट करने, लोकायुक्त की नियुक्ति संबंधी प्रावधान स्पष्ट करने और कुछ वैधानिक संस्थाओं में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों को लोकायुक्त के दायरे में लाने जैसे बदलाव किए गए। इन सुझावों के आधार पर महाराष्ट्र लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक 11 दिसंबर 2025 को विधानसभा में पेश किया गया और उसी दिन दोनों सदनों ने इसे मंजूरी दे दी।

अध्यक्ष के साथ सदस्यों की नई व्यवस्था

नए कानून के तहत लोकायुक्त संस्था में अध्यक्ष के साथ सदस्यों की नियुक्ति की व्यवस्था है। अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायालय के मौजूदा या पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या मुंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीश में से पात्र व्यक्ति की नियुक्ति की जा सकती है। अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच साल या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो पहले हो, रहेगा। इससे पहले 14 अगस्त को लोकायुक्त संस्था के चार सदस्यों ने शपथ ली थी।

सुनील शुक्रे ने महाराष्ट्र लोकायुक्त अध्यक्ष पद की ली शपथ

उधर बाम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे राज्य के लोकायुक्त संस्था के नए अध्यक्ष बने हैं। मंगलवार को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शुक्रे को लोकायुक्त अध्यक्ष के रूप में शपथ दिलाई। लोकभवन (राजभवन) में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, विधानसभा में शिवसेना (उद्धव) के विधायक दल नेता भास्कर जाधव, निवर्तमान लोकायुक्त न्यायमूर्ति विद्यासागर कनाडे, गोवा राज्य के लोकायुक्त न्यायमूर्ति संदीप शिंदे, महाराष्ट्र के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे, महाराष्ट्र लोकायुक्त संस्था के सदस्य और राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल उपस्थित थे। शुक्रे की नियुक्ति साल 2023 के नए महाराष्ट्र लोकायुक्त कानून के अनुसार की गई है। उनकी यह नियुक्ति पांच साल अथवा 70 वर्ष आयु पूरी होने तक इसमें से जो पहले होगा, तब तक रहेगी। शुक्रे का जन्म 25 अक्टूबर 1961 को हुआ। उन्होंने साल 1980 में पुणे विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने अमरावती के डॉ. पंजाबराव देशमुख विधि महाविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। फिर उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. डिग्री हासिल की। न्यायिक सेवा में उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया। शुक्रे कोल्हापुर में प्रधान जिला न्यायाधीश, बाम्बे हाईकोर्ट के नागपुर खंडपीठ में रजिस्ट्रार (प्रशासन), ठाणे के उत्तन स्थित महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी में सहनिदेशक, नागपुर में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दी। शुक्रे ने मार्च 2011 में बाम्बे हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल के रूप में पदभार स्वीकारा। इसके बाद साल 2013 में न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति हुई। शुक्रे अक्टूबर 2023 में बाम्बे हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे। जिसके बाद राज्य सरकार ने शुक्रे को महाराष्ट्र राज्य पिछड़ावर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

Created On :   25 Aug 2026 10:14 PM IST

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