बॉम्बे हाई कोर्ट: एमसीए की कैंटीनों का फिर से एफडीए निरीक्षण करने का आदेश, मराठी भाषा नियम के खिलाफ रिक्शा ड्राइवरों ने दरवाजा खटखटाया

एमसीए की कैंटीनों का फिर से एफडीए निरीक्षण करने का आदेश, मराठी भाषा नियम के खिलाफ रिक्शा ड्राइवरों ने दरवाजा खटखटाया
  • मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) की 5 कैंटीनों के लाइसेंस सस्पेंड करने का मामला
  • अदालत ने एफडीए को एमसीए की कैंटीनों का निरीक्षण कर हलफनामा दाखिल करने का दिया निर्देश
  • राज्य सरकार के मराठी भाषा के नियम के खिलाफ रिक्शा ड्राइवरों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) की 5 कैंटीनों के लाइसेंस सस्पेंड करने के मामले में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) को कैंटीनों का फिर से निरीक्षण करने का आदेश दिया। अदालत ने दूषित ड्रिंक्स को क्रिकेटरों के लिए "नॉन-वेजिटेरियन चाय’ कहकर मजाक किया, क्योंकि अदालत ने पाया कि एमसीए की कैंटीनों में कीड़े-मकोड़े पाए गए थे। अदालत ने एफडीए के दोबारा निरीक्षण से पहले एमसीए को अपनी जगह की अच्छी तरह से सफाई करने का निर्देश दिया गया। 29 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई रखी गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ के समक्ष एमसीए की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट संस्था के परिसर में चल रहे पांच कैंटीनों के लाइसेंस सस्पेंड करने के एफडीए के फैसले को चुनौती दी गई थी। एफडीए के मुताबिक लाइसेंस एमसीए के नाम पर जारी होने के बावजूद कैंटीन एक दूसरी कंपनी एम. एस. शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा चलाई जा रही थीं। एमसीए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विक्रम नानकानी ने दलील दी कि एफडीए को पहले सुधार के लिए नोटिस जारी करना चाहिए था, जिससे कैंटीनों को कमियों को ठीक करने का मौका मिल सके। पीठ ने कहा कि जब एफडीए अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान "भारी गड़बड़ियां’ मिलीं, तो ऐसा करना जरूरी नहीं था। एफडीए की निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक खाने-पीने की जगहों की रसोई में कॉकरोच और मक्खियां थीं। फर्श फिसलन भरा और गंदा था। अगर साफ-सफाई के नियमों का गंभीर उल्लंघन होता है, तो एफडीए तुरंत लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसला ले सकता है। इस पर वरिष्ठ वकील विक्रम नानकानी ने कहा कि सभी कैंटीनों के खाने-पीने की जगहों के बंद होने की वजह से एमसीए मैदान पर खेलने आने वाले क्रिकेटरों को चाय भी नहीं पिला पा रहा था। पीठ ने यह भी कहा कि पूरा राज्य और वहां के लोग एफडीए की कार्रवाई की तारीफ कर रहे हैं और भविष्य में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। एफडीए जो कर रहा है, वह तारीफ के काबिल है, लेकिन एक बार जब कोई रेस्टोरेंट या खाने-पीने की जगह कमियों को दूर कर ले, तो सस्पेंशन ऑर्डर तुरंत वापस ले लिया जाना चाहिए।

राज्य सरकार के मराठी भाषा के नियम के खिलाफ रिक्शा ड्राइवरों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

उधर राज्य सरकार के मराठी भाषा के नियम के खिलाफ रिक्शा ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जनहित याचिका (पीआईएल) में दावा किया गया है कि अगर यह नियम लागू होता है, तो लाखों गरीब और दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के बैज सस्पेंड हो सकते हैं और परमिट रद्द हो सकते हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक 26 अगस्त को मामले की सुनवाई हो सकती है। मोबाइल कैब एग्रीगेटर ऐप का इस्तेमाल करके कैब चलाने वाले चार ड्राइवरों द्वारा वकील विवेक शुक्ला के जरिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 12 अगस्त की सरकारी अधिसूचना के जरिए लागू किया गया था। याचिका में सरकारी अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया गया है, जिससे राज्य में लगभग 9 लाख 65 ड्राइवरों को होने वाली परेशानी से बचाया जा सके। याचिका में कहा गया है कि मराठी भाषा का नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (व्यापार और पेशा करने की आजादी) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह मोटर वाहन अधिनियम 1988 के भी खिलाफ है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भाषा की कोई शर्त नहीं रखी गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि मूल अधिनियम (मोटर वाहन अधिनियम) राज्य सरकार को ड्राइवर के लिए किसी भाषा का कामकाजी ज्ञान योग्यता के तौर पर बैज की शर्त के तौर पर या परमिट की शर्त के तौर पर तय करने की कोई शक्ति नहीं देता है और न ही ऐसी किसी वजह से बैज को सस्पेंड या रद्द करने की शक्ति देता है। विवादित अधिसूचना एक नई अयोग्यता और सस्पेंशन एवं कैंसिलेशन का एक नया आधार बनाती है, जिसे संसद ने कभी नहीं बनाया था।

Created On :   25 Aug 2026 9:58 PM IST

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