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महाराष्ट्र एटीएस: जांच में ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5-6 नाबालिग भी थे शामिल, अब एजेंसियों के रडार पर हैं - रची जा रही थी धमाकों की साजिश

Mumbai News. दिवाकर सिंह. देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे एक मामले में महाराष्ट्र एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन कट्टरपंथ के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे युवक आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे,जिसमें महाराष्ट्र से गिरफ्तार दो आरोपी और उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया मुख्य हैंडलर बड़ा इमरान भी शामिल था। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इस नेटवर्क के खिलाफ मामला तब दर्ज किया, जब कुछ मैसेंजर ग्रुप्स में शामिल लोग भारतीय जमीन पर हमले की न केवल चर्चा कर रहे थे, बल्कि उससे आगे बढ़कर उसकी तैयारी की कोशिश करते हुए भी नजर आए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में 5-6 नाबालिग भी शामिल हैं, जिन्हें ऑनलाइन माध्यम से कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया जा रहा था। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बाबरी मस्जिद, एनआरसी और 'ग़ज़वा-ए-हिंद’ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के जरिए युवाओं में कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश की जा रही थी। कुछ चैट्स में भारत में शरिया कानून लागू करने और भारतीय संविधान के खिलाफ खिलाफत स्थापित करने की बातें भी सामने आई हैं।
बड़ा इमरान निकला नेटवर्क का हैंडलर
इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बड़ा इमरान बताया जा रहा है, जिसे उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया है। एजेंसियों का मानना है कि उसी के निर्देश पर अलग-अलग राज्यों में मौजूद युवक काम कर रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के संपर्क में थे और विदेशी कनेक्शन की भी आशंका जताई जा रही है।
ठाणे और मुंबई से अहम सुराग
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के खडावली से गिरफ्तार आरोपी के घर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल हमले की तैयारी के लिए किया जा रहा था। वहीं, मुंबई के कुर्ला से गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद हम्माद सलाउद्दीन महमूद अली सिद्दीकी(18) के घर और मोबाइल फोन से आपत्तिजनक संदेश और दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि मुंबई के दो आरोपियों ने आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने के लिए खिलौना ट्रेन का इस्तेमाल करने की कोशिश की। छापेमारी के दौरान तार, सर्किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह सब बड़ा इमरानके निर्देश पर किया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आए मामलों से यह साफ हो रहा है कि आतंकी संगठनों की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। पहले आईएसआईएस जैसे प्रतिबंधित संगठन युवाओं को विदेश जाकर शामिल होने के लिए कट्टरपंथी बनाते थे, लेकिन अब उन्हें भारत में ही आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस तरह के मॉड्यूल्स के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ हो सकता है और देश में अन्य स्लीपर सेल्स के सक्रिय होने की आशंका भी जताई जा रही है।
सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म बना माध्यम
जांच में यह भी सामने आया है कि कई युवक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैट एप्स के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या पब्जी जैसे गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आरोपियों का संपर्क संदिग्ध लोगों से हुआ। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के पास से कई डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और कट्टरपंथी सामग्री जब्त की है। इनकी फोरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित साजिश के दायरे का पता लगाया जा रहा है।
कुर्ला कनेक्शन - पिता बोले मेरा बेटा बेगुनाह
इस मामले में कुर्ला से गिरफ्तार 18 वर्षीय हमाद के पिता जलालुद्दीन ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि मेरा बेटा पढ़ाई में होशियार है और इस साल 12वीं की परीक्षा देने वाला था। उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन साल से पब्जी खेलता था और हाल के महीनों में कुछ अनजान लोगों से फोन पर लंबी बातचीत करता था, लेकिन उन्हें कभी कोई शक नहीं हुआ। पिता का दावा है कि पुलिस को उनके घर से कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला। सिर्फ दो मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें एक मेरा और दूसरा मेरे बड़े बेटे का है।
जांच जारी, बड़े नेटवर्क की आशंका
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा हो सकता है, जिसके तार देश के साथ-साथ विदेश तक फैले हो सकते हैं। यह मामला एक बार फिर इस खतरे की ओर इशारा करता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को निशाना बनाकर देश की सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है और क्यों समय रहते ऐसे नेटवर्क्स को तोड़ना बेहद जरूरी है।
Created On :   6 April 2026 10:12 PM IST











