बॉम्बे हाई कोर्ट: पीओपी की प्रतिमाओं के विसर्जन मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य पद्धति पर उठे सवाल

पीओपी की प्रतिमाओं के विसर्जन मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य पद्धति पर उठे सवाल
  • पीओपी की प्रतिमाओं का प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन का मुख्य विरोध
  • 20 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की कार्य पद्धति पर हाई कोर्ट में उठे सवाल

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट में शुक्रवार को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणपति बप्पा की प्रतिमाओं के प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की कार्य पद्धति पर सवाल उठाए गए। अदालत को सीपीसीबी के अपने स्टैंड में बदलाव पर हैरान है। 2020 में सीपीसीबी ने प्रतिमाओं के प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किया था, उसमें 2025 में बदलाव कर कहा कि उसने प्राकृतिक जलाशयों में प्रतिमाओं के विसर्जन नहीं करने को लेकर सलाह दी थी। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही थी।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष रोहित मनोहर जोशी की ओर से वकील रोनिता भट्टाचार्य की दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई ने दलील दी कि राज्य में 6 फीट से बड़ी पीओपी की प्रतिमाओं को प्राकृतिक जल निकायों में विसर्जन किया जाता है। जबकि सीपीसीबी की 2020 के दिशा निर्देश के मुताबिक इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था। सीपीसीबी की इसकी दिशा निर्देश का कड़ाई से पालन करने के लिए 2024 में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। सीपीसीबी के दिशा निर्देश के अलावा देश भर की अदालतों में समय समय पर पीओपी की प्रतिमाओं को प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन पर रोक लगाने के मामले आए, जिस पर विभिन्न अदालतों ने अपने फैसले सुनाएं हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि याचिकाकर्ता का पीओपी प्रतिमाओं के प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन मुख्य विरोध है, क्योंकि इससे जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हानिकारक है। ऐसे में सीपीसीबी की 2020 के दिशा निर्देश का पीओपी प्रतिमाओं के प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन पर बिना किसी राजीनितक दबाव के रोक लगाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की शुक्रवार को दलील पूरी हो गई। राज्य सरकार और सीपीसीबी 20 जुलाई को इसको लेकर अपना पक्ष रखेगा।

Created On :   17 July 2026 9:25 PM IST

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