बारिश का अभाव: अनिल देशमुख ने कहा - राज्य में भीषण सूखा, किसानों को भरपूर सहायता दें, बर्बादी की कगार पर खरीफ फसलें

अनिल देशमुख ने कहा - राज्य में भीषण सूखा, किसानों को भरपूर सहायता दें, बर्बादी की कगार पर खरीफ फसलें
  • फसल बीमा की शर्तों में ढील देकर तत्काल मुआवजा देने की मांग
  • संतरा-मौसंबी के बागों में बड़े पैमाने पर फल झड़ रहे
  • बारिश के अभाव में खरीफ फसलें बर्बादी की कगार पर खरीफ फसलें

डिजिटल डेस्क, नागपुर. चालू सीजन में बारिश के रूठ जाने से विदर्भ समेत पूरे महाराष्ट्र की खरीफ फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। बारिश के अभाव में खेतों में फसलों को आंखों के सामने सूखता देख किसान आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया है। इस अभूतपूर्व संकट से किसानों को उबारने के लिए राज्य सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और प्रभावित किसानों के लिए भरपूर आर्थिक सहायता की घोषणा करे, ऐसी मांग पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पत्र के माध्यम से की है।

पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के मुताबिक “महाराष्ट्र किसानों का राज्य है और किसान बचेगा तभी राज्य बचेगा। सरकार इस संकट की गंभीरता को समझे और कागजी खानापूर्ति करने के बजाय तत्काल निर्णय लेकर अन्नदाता को वास्तविक राहत दे।”

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में देशमुख ने राज्य की खेती और किसानों की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। बारिश की कमी के कारण नागपुर और अमरावती जिलों में संतरा और मौसंबी के बागों को बड़ा नुकसान हुआ है और बड़े पैमाने पर फल झड़ रहे हैं। कपास, सोयाबीन और तुअर जैसी प्रमुख फसलें खेतों में ही सूखने लगी हैं। सोयाबीन की फसल फलियां भरने की संवेदनशील अवस्था में होने के बावजूद बारिश नहीं होने से उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका पैदा हो गई है।

दूसरी ओर, धान उत्पादक क्षेत्र में धान की फसल झुलस गई है। बची हुई फसल पर ‘तना छेदक’ रोग का प्रकोप होने से धान की फसल भी हाथ से निकलने की स्थिति में है। भूजल स्तर गिरने से आगामी रबी सीजन को लेकर भी किसान गंभीर चिंता में हैं, यह बात देशमुख ने सामने रखी।

बारिश की कमी से हुए फसल नुकसान का प्रशासन के माध्यम से तत्काल और वस्तुनिष्ठ पंचनामा कराने के आदेश दिए जाएं, ऐसी मांग उन्होंने की है। प्रभावित क्षेत्रों में सूखा जैसी स्थिति घोषित कर किसानों को प्रति हेक्टेयर भरपूर अनुग्रह अनुदान दिया जाए। संतरा और मौसंबी के बागों में बड़े पैमाने पर हुए फल झड़ने को देखते हुए बागवानों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। साथ ही धान की फसल पर ‘तना छेदक’ और अन्य रोगों के नियंत्रण के लिए कृषि विभाग के माध्यम से नि:शुल्क मार्गदर्शन, दवा छिड़काव तथा इसके लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

फसल बीमा की शर्तों में ढील देकर सभी प्रभावित किसानों को तकनीकी अड़चनें पैदा किए बिना तत्काल फसल बीमा की राशि दिलाई जाए, यह मांग भी देशमुख ने ज्ञापन के माध्यम से की है।



Created On :   10 Sept 2026 9:31 PM IST

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