नागपुर खंडपीठ: सिर्फ लिखा-पढ़ी नहीं अफसरों की जवाबदेही भी तय करे सरकार, कानून बना और अमल अब भी अधूरा

सिर्फ लिखा-पढ़ी नहीं अफसरों की जवाबदेही भी तय करे सरकार, कानून बना और अमल अब भी अधूरा
  • लोगों के आवेदनों और शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं
  • खंडपीठ ने इस मुद्दे से जुड़ी 14 याचिकाओं पर सुनवाई की
  • राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए

डिजिटल डेस्क, नागपुर. जिला परिषदों में लोगों के आवेदनों और शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल परिपत्र जारी करने से समस्या हल नहीं होगी। अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर क्या परिणाम होंगे और उन्हें लागू कराने की क्या व्यवस्था होगी, यह भी स्पष्ट करना होगा। इसके बिना किसी व्यवस्था को प्रभावी नहीं कहा जा सकता।

कामकाज में सुधार नहीं

न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने इस मुद्दे से जुड़ी 14 याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि बार-बार आदेश देने और सरकारी अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद जिला परिषदों के कामकाज में सुधार नहीं हुआ है। यवतमाल जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास 7 मई 2025 को दिया गया आवेदन भी लंबे समय तक लंबित रहा। अदालत ने 31 अगस्त 2026 को ही राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा था, जिससे लोगों को अपने काम के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा न खटखटाना पड़े।

सरकार की ओर से प्रधान सचिव अतुल पाटणे का शपथपत्र पेश किया गया। इसमें बताया गया कि लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए 11 सितंबर 2026 को परिपत्र जारी किया गया है। हालांकि, अदालत इस पर असमाधान जताया। खंडपीठ ने कहा कि परिपत्र के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह भी तय होना चाहिए। साथ ही परिपत्र के निर्देशों को लागू कराने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है।

कानून बना, अमल अब भी अधूरा

अदालत ने कहा कि सरकारी कामकाज में देरी रोकने संबंधी महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण का नियमन और सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन में देरी रोकने संबंधी अधिनियम, 2005 की धारा 10 वर्ष 2025 में लागू हुई, लेकिन अब तक इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है। सामान्य प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस दिशा में आगे कदम उठाने को कहा गया है। मामले पर दिवाली की छुट्टियों के बाद फिर सुनवाई होगी।

Created On :  

Tags

Next Story