बदल रहा मौसम: बच्चों और बुजुर्गों का रखें ध्यान, गर्म कपड़े के साथ दिनचर्या और खानपान में करें बदलाव

बच्चों और बुजुर्गों का रखें ध्यान, गर्म कपड़े के साथ दिनचर्या और खानपान में करें बदलाव
  • हाइड्रेट रहना आवश्यक है
  • मौसम का बदलता मिजाज सेहत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं

डिजिटल डेस्क, नागपुर. सुबह की हल्की ठंड, दोपहर में तेज धूप और शाम होते ही फिर बढ़ती सिहरन... मौसम का यह बदलता मिजाज सेहत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में शरीर को मौसम के अनुरूप ढालना हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की प्रक्रिया में होती है, वहीं बुजुर्गों का शरीर तापमान में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। ऐसे मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और सांस संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए केवल गर्म कपड़े पहनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी दिनचर्या, खानपान और स्वास्थ्य में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखना जरूरी है।

ठंडी हवा से करें बचाव

बच्चों और बुजुर्गों को मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाना सबसे जरूरी है। एक मोटे कपड़े के बजाय दो-तीन हल्के गर्म कपड़ों की परतें पहनाना बेहतर रहता है। इससे जरूरत के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकते हैं। सुबह और शाम के समय सिर, कान, गर्दन और पैरों को ठंडी हवा से बचाने के लिए टोपी, मोजे और आरामदायक स्वेटर का इस्तेमाल करें। छोटे बच्चों को नहलाने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करें और नहलाने के तुरंत बाद शरीर अच्छी तरह पोंछ कर गर्म कपड़े पहनाएं। बुजुर्गों को सुबह जल्दी और देर शाम ठंड में बाहर निकलने से बचना चाहिए। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और बहुत अधिक गर्म हीटर या ब्लोअर का इस्तेमाल करने से बचें। सोते समय बच्चों को जरूरत से ज्यादा कपड़े या भारी कंबल में न लपेटें, ताकि शरीर अधिक गर्म न हो।

पानी पीते रहें, क्योंकि हाइड्रेट रहना आवश्यक है

डॉ. अविनाश गावंडे, चाइल्ड एक्पर्ट, मेडिकल ने कहा किल सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण बच्चे और बुजुर्ग अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पीते, इस दौरान उनका हाइड्रेट रहना भी जरूरी है। ऐसे में उन्हें नियमित अंतराल पर पानी और अन्य तरल पदार्थ देते रहें। खानपान में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, सूप, दूध और पौष्टिक आहार शामिल करें। बच्चों को बाहर के खुले खाद्य पदार्थों और बहुत ठंडी चीजों से परहेज कराएं। बुजुर्गों को भी संतुलित और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए। इसके अलावा हाथों की सफाई, खांसते और छींकते समय मुंह ढंकने तथा बीमार व्यक्तियों से उचित दूरी रखने की आदत डालें। बच्चों और बुजुर्गों में लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती या भूख-प्यास में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करें। बदलते मौसम में समय पर सावधानी, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य निगरानी ही परिवार के सबसे संवेदनशील सदस्यों को सुरक्षित रखने का बेहतर तरीका है।


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