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Nagpur News: अब नागपुर के एम्य में आंखों की बीमारियों का होगा सटीक निदान

Nagpur News अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नेत्र रोगों अत्याधुनिक निदान होगा। यहां विदर्भ की पहली कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी प्रणाली शुरू की गई है। इस अत्याधुनिक मशीन की मदद से रेटिना, ऑप्टिक नर्व और न्यूरो-ऑफ्थैल्मिक रोगों का शुरुआती चरण में ही सटीक पता लगाया जा सकेगा, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसका उद्घाटन एम्स नागपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी के ने किया। कार्यक्रम में अकादमिक डीन डॉ. रसिका गडकरी, अधीक्षक डॉ. निलेश नागदेवे, प्रशासनिक उपनिदेशक विजय नायक, संयुक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नितिन मराठे, सामान्य शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सिद्धार्थ सहित विविध विभागों के प्रमुख उपस्थित थे।
न्यूरोलॉजिकल कारणों से होने वाली दृष्टि हानि का निदान : डॉ. जोशी ने कहा कि इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी प्रणाली से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को नई मजबूती मिलेगी। इससे मरीजों को अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा हिंगोरानी ने बताया कि यह प्रणाली जटिल नेत्र रोगों की व्यापक जांच के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
विट्रियो-रेटिना विशेषज्ञ डॉ. वंदना अय्यर और डॉ. स्वप्निल माथुरकर ने बताया कि यह मशीन रेटिना और दृष्टि तंत्रिका से जुड़े रोगों के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल कारणों से होने वाली दृष्टि हानि का भी सटीक निदान करने में लाभदायी है। इस प्रणाली से आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने वाले दृश्य संकेतों की कार्यक्षमता की जांच होती है। आंख की विद्युत गतिविधि और रेटिना की बाहरी परत की कार्यक्षमता का मूल्यांकन होता है। रेटिना की प्रकाश ग्रहण करने वाली कोशिकाओं की विद्युत प्रतिक्रिया की जांच कर विभिन्न रेटिना रोगों का पता लगाया जाता है।
न्यूरोलॉजिकल कारणों से होने वाली दृष्टि हानि का निदान : डॉ. जोशी ने कहा कि इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी प्रणाली से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को नई मजबूती मिलेगी। इससे मरीजों को अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा हिंगोरानी ने बताया कि यह प्रणाली जटिल नेत्र रोगों की व्यापक जांच के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
विट्रियो-रेटिना विशेषज्ञ डॉ. वंदना अय्यर और डॉ. स्वप्निल माथुरकर ने बताया कि यह मशीन रेटिना और दृष्टि तंत्रिका से जुड़े रोगों के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल कारणों से होने वाली दृष्टि हानि का भी सटीक निदान करने में लाभदायी है। इस प्रणाली से आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने वाले दृश्य संकेतों की कार्यक्षमता की जांच होती है। आंख की विद्युत गतिविधि और रेटिना की बाहरी परत की कार्यक्षमता का मूल्यांकन होता है। रेटिना की प्रकाश ग्रहण करने वाली कोशिकाओं की विद्युत प्रतिक्रिया की जांच कर विभिन्न रेटिना रोगों का पता लगाया जाता है।
Created On :   15 July 2026 4:45 PM IST















