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गैस संकट के बीच मदद: इस छोटू ने दी बड़ी राहत, मजदूरों के पलायन का डर थमा, ऑयल कंपनियों ने 649 रुपए में शुरू की विशेष सिलेंडर योजना

Nagpur News. औद्योगिक क्षेत्रों में गहराते गैस संकट ने मजदूरों के सामने रोज़ का खाना पकाने तक का संकट खड़ा कर दिया था। हालत ऐसे हो गए थे कि कई प्रवासी श्रमिकों ने काम छोड़कर अपने गांव लौटने की तैयारी शुरू कर दी थी। उद्योगों के सामने मजदूरों के पलायन का खतरा मंडराने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को राहत देने के लिए 5 किलो के छोटे एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराना शुरू किया है।
आधार कार्ड पर नया कनेक्शन
रविवार को तीनों ऑयल कंपनियां के माध्यम से यह पहल शुरू की है। कंपनियों के डीलर्स औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को 5 किलो का छोटा एलपीजी सिलेंडर (छोटू सिलेंडर) 649 रुपए में उपलब्ध करा रही हैं। जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं है, उन्हें आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के आधार पर करीब 1688 रुपए में नया कनेक्शन भी दिया जा रहा है।
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पहुंच रही कंपनियों की वैन
डीलर्स हिंगना, बुटीबोरी, मिहान सहित जिले के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में वैन के जरिए पहुंच रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम करते हैं। डीलर मजदूरों से सीधे संपर्क कर उन्हें छोटे सिलेंडर दे रहे हैं। जिन मजदूरों तक वैन नहीं पहुंच पा रही है, उन्हें अपने नजदीकी डीलर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है, ताकि वे आसानी से सिलेंडर प्राप्त कर सकें।
लाखों प्रवासियों को राहत
जिले के हिंगना, बुटीबोरी और मिहान जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 2 से 3 लाख प्रवासी मजदूर काम करते हैं। ये मजदूर मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन, छोटे-मध्यम उद्योग, पावरलूम, वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में कार्यरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रमिकों की है। अधिकांश मजदूर किराये के कमरों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में रहते हैं और खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं।
टीम काम में लगी है
नितिन खोत, बिक्री प्रबंधक, बीपीसीएल के मुताबिक हमारी टीमें अलग-अलग एमआईडीसी क्षेत्रों में जाकर मजदूरों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें सिलेंडर दे रही हैं। जरूरतमंद मजदूरों को पहचान पत्र के आधार पर नए कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं।
खर्च का बोझ बढ़ रहा था
वेदांत उज्जैनकर, प्रवासी मजदूर के मुताबिक बाहर से खाना मंगाकर खाना पड़ रहा था और खर्च भी बढ़ गया था। छोटा सिलेंडर मिलने से बड़ी राहत मिली है।
काफी दिक्कतें हो रहीं थीं
अंकित कुमार दुबे, प्रवासी मजदूर के मुताबिक गैस की परेशानी के कारण बाहर से खाना लेना पड़ता था। यह व्यवस्था पहले हो जाती तो इतनी परेशानी नहीं होती।
Created On :   6 April 2026 7:47 PM IST











