सियासी दावे: राजनीतिक शून्यता के कारण हमारे संपर्क में हैं उद्धव के विधायक-सांसद, 100 साल से अधिक की होने के बाद भी अपरिपक्व है कांग्रेस

राजनीतिक शून्यता के कारण हमारे संपर्क में हैं उद्धव के विधायक-सांसद, 100 साल से अधिक की होने के बाद भी अपरिपक्व है कांग्रेस
  • शिवसेना शिंदे के प्रवक्ता संजय निरुपम ने की खुलकर चर्चा
  • विलीनीकरण की बातें दुर्भाग्य पूर्ण

Nagpur News. पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की नीति, रणनीति की आलोचना करते हुए शिवसेना शिंदे गुट के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा है कि ठाकरे अपने गुट को भी संभाल नहीं पा रहे हैं। उनकी राजनीतिक शून्यता के कारण उनकी पार्टी के विधायक-सांसद भाजपा व हमारे यानी शिवसेना शिंदे के संपर्क में है। उचित समय का इंतजार कर रहे हैं। बारामती में विधानसभा के उपचुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवारी की घोषणा को लेकर उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस 100 साल के बाद भी परिपक्व नहीं हो पायी है। वह सठिया गई है। सोमवार को प्रेस क्लब में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में निरुपम बोल रहे थे।

भविष्य की चिंता

निरुपम ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के विधायक-सांसद को कैरियर अर्थात भविष्य की चिंता है। 2019 में मुख्यमंत्री बनने के लिए उद्धव ठाकरे ने राजनीतिक व्यभिचार किया। युति धर्म तोड़ा। बालासाहब ठाकरे के हिंदुत्व को धोखा दिया। असंतोष के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में विभाजन हुआ। राजनीति में किसी दल का टूटना , बिखरना नई बात नहीं है। लेकिन शरद पवार के सहयोग के बाद भी उद्धव ठाकरे शिवसेना को संभाल नहीं पाए। मनपा व अन्य नगर निकाय चुनावों में भी उद्धव घर से बाहर नहीं निकले। कई जगह उनकी पार्टी का परिणाम शून्य रहा। लिहाजा मुंबई के 2-3 सांसद को छोड़कर उनकी पार्टी के सभी सांसद व विधायक हमारे संपर्क में है।

कांग्रेस की जिद ठीक नहीं

बारामती विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जिताने का आव्हान करते हुए निरुपम ने कहा कि किसी बड़े नेता के निधन के बाद निर्विरोध उपचुनाव महाराष्ट्र की राजनीति की परंपरा रही है। कांग्रेस की जिद ठीक नहीं है। अभी भी उससे अपेक्षा है कि उम्मीदवार न उतारे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी निर्विरोध चुनाव का आव्हान किया है। कांग्रेस की जिद से लगता है कि वह अपरिपक्त है, सठिया गई है।

विलीनीकरण की बातें दुर्भाग्य पूर्ण

राकांपा व शिवसेना के गुटों के विलीनीकरण की बातों को निरुपम ने दुर्भाग्यपूर्ण कहा। उनके अनुसार शिवसेना में उद्धव गुट के विलय का प्रस्ताव नहीं आया है। अजित पवार की मृत्यु के बाद शरद पवार राकांपा के विलीनीकरण की बात करने लगे है। अब उद्धव ठाकरे भी अपने गुट के विलय की बात कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता का इस्तेमाल तो नहीं

अशोक खरात प्रकरण को लेकर निरुपम ने कहा कि इस तरह के ढोंगी बाबा राजनीतिक लोगों तक संपर्क बढ़ाये रखते है। कई बार राजनीतिज्ञों से पहचान का गैर इस्तेमाल किया जाता है। आशाराम बापू को सम्मान देनेवालों में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। बाबाओं की अधिक जानकारी राजनीतिज्ञों को भी नहीं रहती है। अंजलि दमानिया इस प्रकरण में सीडीआर की जो बात कर रही है वह जांच में स्पष्ट होगी ही, लेकिन यह भी न हो कि दमानिया समान सामाजिक कार्यकर्ता किसी के लिए इस्तेमाल न हो जाए। महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही महिला आरक्षण कानून बनने की उम्मीद है।

विमान हादसे पर संदेह नहीं

विमान हादसे में अजित पवार की मृत्यु के मामले में निरुपम ने कहा कि उन्हें इसमें किसी साजिश का संदेह नहीं लगता है। फिर भी जांच के बाद वास्तविकता सामने आयेगी। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा मित्रदलों को समाप्त नहीं करती है। बिहार में नीतीशकुमार की पार्टी के विधायकों की संख्या कम नहीं हुई है। चर्चा के दौरान शिवसेना पदाधिकारी सुमुख मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

Created On :   6 April 2026 5:56 PM IST

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