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Nagpur News: संघ किसी संगठन का रिमोट कंट्रोल0 नहीं , हमारा काम केवल स्वयंसेवक निर्माण: मोहन भागवत

Nagpur News राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी भी संगठन या संस्था का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं चलाता। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, जबकि संघ का मूल कार्य व्यक्तिनिर्माण और समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक निर्माण एक आजीवन साधना है, जिसमें केवल समय और श्रम ही नहीं, बल्कि अपने स्वभाव और अहंकार तक का समर्पण करना पड़ता है। वे नागपुर के लक्ष्मीनगर स्थित साइंटिफिक सोसायटी सभागार में आयोजित ‘डॉ. हेडगेवार – आधुनिक युग के शालिवाहन’ यूट्यूब वीडियो के सार्वजनिक प्रसारण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मिलिंद रहाटगांवकर की दृकश्रव्य श्रृंखला ‘असु आम्ही सुखाने, पत्थर पायातील’ के 101वें भाग का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश अवचट, सचिव श्रीराम पिंपलीकर सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
आत्मसंतुष्टि से बचें : डॉ.भागवत ने कहा कि किसी भी संस्था का कार्य बढ़ने के साथ समाज में उसके प्रति विश्वास, सम्मान और प्रेम भी बढ़ता है। संसाधन उपलब्ध होने लगते हैं और प्रशंसा भी मिलने लगती है, लेकिन यही वह समय होता है जब संगठन को आत्मसंतुष्टि से बचते हुए आत्ममंथन करना चाहिए। कार्य का स्वरूप बदल सकता है, पर उसके मूल विचार और तत्व नहीं बदलने चाहिए। उन्होंने कहा कि विचारों और सिद्धांतों को केवल पुस्तकों से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना पड़ता है।
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किसी भी कार्य को समझने के लिए उसकी जड़ों तक पहुंचना आवश्यक है। दूसरों से अपेक्षा करने से पहले स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। संघ का उद्देश्य केवल सक्रिय कार्यकर्ता तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे स्वयंसेवक बनाना है जो अपने जीवन में संघ के संस्कारों को जीते हों। सरसंघचालक ने कहा कि संघ की शाखा केवल दैनिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तिनिर्माण की प्रयोगशाला है। शाखा से निकलने वाला स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर समाज के लिए कार्य करता है। संघ को पढ़ने या सुनने से अधिक प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझा जा सकता है।
अहंकार नहीं : उन्होंने स्वयंसेवक निर्माण की प्रक्रिया को जीवनभर चलने वाली साधना बताते हुए कहा कि समर्पण के बाद भी व्यक्ति के मन में ‘मैं समर्पित हूं’ का अहंकार नहीं आना चाहिए। सच्चा स्वयंसेवक वही है जो निरंतर स्वयं को बेहतर बनाता रहे और समाज के लिए कार्य करता रहे।
भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक का पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन भी आदर्श होना चाहिए। समाज में श्रेष्ठ आचरण प्रस्तुत कर नए स्वयंसेवकों का निर्माण करना ही वास्तविक सक्रियता है। उन्होंने बताया कि देश-विदेश से अनेक लोग संघ के कार्य को देखने आते हैं और यह जानना चाहते हैं कि क्या उनके देशों के युवाओं को भी समाज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का ऐसा प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
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Created On :   4 July 2026 6:34 PM IST













