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Nagpur News: किसानों को बड़ी राहत: खेती के काम के लिए मिट्टी-मुरूम पर रॉयल्टी खत्म

Nagpur News महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती और कृषि विकास से जुड़े कार्यों के लिए मिट्टी, गाद और मुरूम जैसे गौण खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी (स्वामित्व शुल्क) पूरी तरह समाप्त कर दी है। अब किसानों को अपनी जमीन के विकास, कुआं खोदने, तबेला (पशुशाला) बनाने या शेतघर (फार्म हाउस) की मरम्मत एवं निर्माण के लिए इन खनिजों के उपयोग पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा और विधान परिषद में यह घोषणा की। इसके तुरंत बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में शासन निर्णय (जीआर) भी जारी कर दिया। बावनकुले ने कहा कि यदि किसान अपनी जरूरत के लिए मिट्टी, गाद या मुरूम का परिवहन करते हैं तो उनके ट्रैक्टर, ट्रक या बैलगाड़ियों को न तो रोका जाएगा और न ही उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाले पुलिस या राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
खेत सुधार और ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा : सरकार का मानना है कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है, इसलिए किसानों को राहत देना और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देना जरूरी है। नए फैसले के तहत किसान जलसंपदा एवं मृदा-जल संरक्षण विभाग के अधीन आने वाले जलकुंभ, गांव तालाब, खेत तालाब, पाझर तालाब, नाले, बंधारे, मालगुजारी तालाब, लघु सिंचन परियोजनाओं के जलाशयों तथा अपनी कृषि भूमि से गाद, मिट्टी और मुरूम निकाल सकेंगे। इनका उपयोग खेतों में जमा कीचड़ हटाने, खेत मार्गों के गड्ढे भरने, कुआं खोदने, पशुशाला निर्माण, शेतघर की मरम्मत और अन्य कृषि कार्यों में किया जा सकेगा।
अनुमति की प्रक्रिया हुई आसान : किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। किसान को केवल स्थानीय तलाठी के पास एक साधारण आवेदन देना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित मंडल अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अनुमति देना अनिवार्य होगा।
यदि गाद या मिट्टी किसी तालाब अथवा नाले से निकाली जानी है, तो संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना होगा। जलसंधारण विभाग के जलस्रोतों के लिए उस विभाग तथा राजस्व विभाग के नालों के लिए तहसीलदार की अनुमति आवश्यक रहेगी।
व्यावसायिक उपयोग पर रहेगी रोक : राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल किसानों के व्यक्तिगत और कृषि उपयोग के लिए दी गई है। मिट्टी, गाद या मुरूम का व्यावसायिक उपयोग अथवा बिक्री करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बावनकुले ने कहा, “सरकार का उद्देश्य किसानों को राहत देना और खेती से जुड़े विकास कार्यों को आसान बनाना है। इस सुविधा का लाभ केवल कृषि और व्यक्तिगत उपयोग के लिए ही लिया जा सकेगा।”
Created On :   3 July 2026 4:15 PM IST















