बुटीबोरी: अतिरिक्त बुटीबोरी में तैयार हो रहा सोलर इंडस्ट्रियल क्लस्टर, ऑरेंज सिटी से सोलर सिटी की उड़ान

अतिरिक्त बुटीबोरी में तैयार हो रहा सोलर इंडस्ट्रियल क्लस्टर, ऑरेंज सिटी से सोलर सिटी की उड़ान
  • गुजरात से मुकाबले की तैयारी
  • सरकारी नीतियों से बड़ा बूस्ट

Nagpur News. फैज़ल खान. संतरों की खुशबू से पहचान बनाने वाला नागपुर अब ग्रीन एनर्जी की चमक से नई पहचान गढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह शहर केवल ‘ऑरेंज सिटी’ ही नहीं, बल्कि देश की बड़ी ‘सोलर सिटी’ के रूप में भी उभर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में नागपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश सोलर सेक्टर में आया है। इस निवेश से यहां एक विशाल ग्रीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर आकार ले रहा है। सबसे ज्यादा गतिविधि बुटीबोरी और अतिरिक्त बुटीबोरी एमआईडीसी में दिखाई दे रही है। जहां देश की कई बड़ी सोलर कंपनियां अपने प्लांट स्थापित कर रही हैं। खास बात यह है कि नागपुर में इंगॉट, वेफर, सोलर सेल, मॉड्यूल और बैटरी स्टोरेज तक पूरी सोलर मैन्युफैक्चरिंग चेन तैयार की जा रही है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे बैकवर्ड इंटीग्रेशन कहा जाता है। जहां कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह होती है। इससे न केवल उत्पादन लागत कम होती है। साथ ही गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।

इसलिए निवेशकों की पसंद

देश के बिल्कुल मध्य में स्थित नागपुर लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। यहां से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम चारों दिशाओं में माल भेजना आसान है। मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग, मजबूत रेलवे नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की वजह से कंपनियों की ट्रांसपोर्ट लागत कम होती है। इसके साथ ही मिहान-सेज, बुटीबोरी एमआईडीसी और अतिरिक्त बुटीबोरी एमआईडीसी जैसे औद्योगिक क्षेत्र पहले से मौजूद हैं। जहां कंपनियों को जमीन और आधारभूत सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं।

विकासित हो रही चेन

अमित अग्रवाल, सोलर इंडस्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक बुटीबोरी और अतिरिक्त बुटीबोरी में जिस तरह इंगॉट से लेकर वेफर, सोलर सेल और मॉड्यूल तक पूरी मैन्युफैक्चरिंग चेन विकसित हो रही है, वह इसे खास बनाती है। देश में बहुत कम जगहों पर इतनी बड़ी वर्टिकली इंटीग्रेटेड सोलर इंडस्ट्री एक साथ विकसित हो रही है। नागपुर की भौगोलिक स्थिति, बेहतर लॉजिस्टिक्स और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

सरकारी नीतियों से बड़ा बूस्ट

महाराष्ट्र सरकार की मेगा प्रोजेक्ट और थ्रस्ट सेक्टर पॉलिसी के तहत सोलर कंपनियों को टैक्स में छूट, जमीन पर सब्सिडी और बिजली दरों में विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी नीति के चलते कई बड़ी कंपनियां नागपुर में निवेश के लिए आगे आई हैं। सरकार का लक्ष्य यहां सोलर मॉड्यूल मैनुफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करना है।

गुजरात से मुकाबले की तैयारी

फिलहाल सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में गुजरात देश का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन नागपुर में तेजी से विकसित हो रहा यह ग्रीन एनर्जी हब आने वाले वर्षों में बड़ा प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोलर में अभी भी चीन का प्रभुत्व है । हालाकि, आने वाले सालों में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मैन्युफैक्चरर बन सकता है। इस लक्ष्य में नागपुर की भूमिका अहम होगी।

नागपुर में बड़ा निवेश

वारी एनर्जी

  • निवेश : 6,200 करोड़ रुपए
  • उत्पादन : इंटीग्रेटेड सोलर इंगॉट और वेफर

अवाडा इलेक्ट्रो

  • निवेश : 13,650 करोड़ रुपए
  • उत्पादन : सोलर सेल और मॉड्यूल

गैलेक्सी सोलर एनर्जी

  • निवेश : 10,080 करोड़ रुपए
  • उत्पादन : सोलर सेल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज

जुपिटर इंटरनेशनल

  • निवेश : 10,900 करोड़ रुपए
  • उत्पादन : वेफर, सेल और मॉड्यूल

संगम सोलर

  • निवेश : 11,500 करोड़ रुपए
  • उत्पादन : सोलर इंगॉट और वेफर

Created On :   29 March 2026 7:45 PM IST

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