- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- किसानों की फसल चट कर रहे वन्यजीव,...
अध्ययन में खुलासा: किसानों की फसल चट कर रहे वन्यजीव, हर साल बढ़ रहे हमले, पेंच टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए स्वर्ग, स्थानीयों के लिए बना खतरा

Nagpur News. पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित शिलारी गांव के किसानों के लिए जंगली जानवर समस्या बन गए हैं। खेतों से लौटते किसान-महिलाओं पर हमले, फसलों का भारी नुकसान और लगातार भय किसानों की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।
72.33 लाख रुपए मुआवजा दिया
महाराष्ट्र वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पेंच रिजर्व के 6 गांवों में फसल नुकसान के मुआवजे के दावे तेजी से बढ़े हैं। वर्ष 2022 में प्रति गांव मुआवजा लेने वालों की संख्या 1 से 20 के बीच थी, जो 2025 में 28 से 123 तक पहुंच गई। प्रति गांव औसत संख्या 6.8 से बढ़कर 53 हो गई। 2022 में कुल 26 किसानों को करीब 3 लाख रुपये मुआवजा मिला, जबकि 2025 में 318 किसानों को लगभग 48 लाख रुपये दिए गए। पिछले चार वर्षों में इन 6 गांवों में कुल 565 किसानों को 72.33 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि यह राशि उनके वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं करती।
यह भी पढ़े -सब्जियां धड़ाम क्यों हुई धड़ाम? थोक में 2 रुपए किलो टमाटर, फूल व पत्ता गोभी के खरीदार नहीं
राज्य में स्थिति और गंभीर
राज्य स्तर पर स्थिति और गंभीर है। 2020 से 2024 तक वन विभाग को मानव-वन्यजीव संघर्ष के 10,59,928 मामले मिले, जिनमें फसल, पशुधन और आजीविका का नुकसान शामिल था। मात्र 5,09,444 मामले (48%) ही मंजूर हुए और सरकार ने 210.42 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में वितरित किए। माइग्रेशन स्टोरी द्वारा नागपुर में आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान बिजेन्द्र दुबे और कुणाल नक्षणे द्वारा किए अध्ययन में यह आंकड़े सामने आए हैं। उनके अध्ययन के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए स्वर्ग है, लेकिन स्थानीय किसानों के लिए रोजमर्रा का खतरा है।
जानवर फसल रौंद देते थे
शिलारी गांव के किसान श्यामलाल हीरपाजी (54) बताते हैं, ‘मेरे खेत रिजर्व की सीमा से सटे हैं। पहले 3 एकड़ में दो फसलें लेता था, लेकिन जंगली सूअर, हिरण और अन्य जानवर फसल रौंद देते थे। अब सिर्फ 2 एकड़ में ही खेती कर पाता हूं।’
रंगीन सोलर लाइट का सहारा किसानों ने पहले रातभर मचान पर पहरा दिया, लेकिन अब रंगीन सोलर लाइट का सहारा लिया है। सतपुड़ा फाउंडेशन और लायंस क्लब ऑफ मुलुंड की मदद से शिलारी समेत आसपास के गांवों में 450 किसानों को 500 सोलर लाइटें दी गईं। इनमें ‘परब्रक्ष’ नामक उपकरण शामिल हैं, जो 250 मीटर तक रोशनी फैलाता है और जानवरों को इंसानी उपस्थिति का भ्रम पैदा करता है। किसान शिवदास कूदवते (57) कहते हैं, ‘पहले हिरण, सांबर, नीलगाय और जंगली सुअर खेतों में घुस आते थे।
यह भी पढ़े -जमीन आवंटन के बाद भी काम शुरू नहीं, 33 कंपनियों को नोटिस - अगले हफ्ते डॉ. इटनकर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक
अब रंगीन एलईडी लाइट लगने से रात में जानवरों का आना बंद हो गया है। खेती की रखवाली की मेहनत से राहत मिली है।” कई किसान सस्ती चाइनीज एलईडी लाइट भी इस्तेमाल कर रहे हैं, हालांकि उन्हें रोज चार्ज करना पड़ता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है, लेकिन सोलर लाइट जैसी तकनीक और बेहतर मुआवजा व्यवस्था से किसानों की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है। पेंच के किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और एनजीओ मिलकर स्थायी समाधान निकालेंगे, ताकि खेती और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रहें।
Created On :   28 March 2026 8:23 PM IST










