कार्यशाला: ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी के तहत कार्यस्थलों पर औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा को लेकर जागरुकता बेहद जरूरी

ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी के तहत कार्यस्थलों पर औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा को लेकर जागरुकता बेहद जरूरी
  • औद्योगिक मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता
  • ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी पर बोले वक्ता

Nagpur News. औद्योगिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य का महत्व को लेकर दी इन्स्टिटयूट ऑफ इंजीनियर्स (टीआईई) नागपुर शाखा ने कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम में उद्योग जगत में बढ़ती चुनौतियों और जोखिमों के बीच सुरक्षा संस्कृति को मजबूती देने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला का विषय ‘ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी’ रखा गया था। कार्यक्रम में इंजीनियरों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान सुरक्षा मानकों, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य जोखिम, औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण के दौर में यदि सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता नहीं दी गई तो इसका सीधा असर कर्मचारियों के स्वास्थ्य, उत्पादकता और संस्थानों की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।

औद्योगिक मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता

मुख्य वक्ता इंजीनियर जयंत जोशी ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा संस्कृति विकसित करने, जोखिम प्रबंधन को प्रभावी बनाने और औद्योगिक मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कहा कि सुरक्षित कार्य वातावरण ही सतत विकास और दुर्घटनामुक्त उद्योगों की मजबूत नींव है।कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. संदीप शिडखेड़कर के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और पेशेवर विकास में संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं देविदास शिंदे ने तकनीकों में योगदान की जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक डॉ. जे. एफ. अग्रवाल ने कार्यशाला के उद्देश्यों और औद्योगिक परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. महेश शुक्ला ने और प्रतिक चांदुरकर ने आभार व्यक्त किया।

Created On :   23 April 2026 5:54 PM IST

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